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हाउसिंग बोर्ड : 3 साल में 6 अफसरों ने किए घोटाले, ACB जांच शुरू

8 वर्ष पहले
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जोधपुर.राजस्थान आवासन मंडल के वर्ष 2001 से 2003 के दौरान हुए कई कार्यो में अफसरों ने अनियमितताएं बरतीं। कई कार्य बिना टेंडर के महज कोटेशन के आधार पर करवा लिए तो किसी में स्टे के बावजूद निर्माण कार्य करवा लिया। अफसरों की इन अनियमितताओं की शिकायत होने पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने पीई दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इन अफसरों के खिलाफ हो रही जांच
एसके भाटिया, उप आवासन आयुक्त (अब सेवानिवृत्त)
आरसी सिंघवी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता (अब सेवानिवृत्त)
सौरभ वाष्र्णेय, तत्कालीन परियोजना अभियंता
अशोक भाटी, आवासीय अभियंता
सीपी पुरोहित, आवासीय अभियंता (अब सेवानिवृत्त)
एसआर जोशी, तत्कालीन उप आवासन आयुक्त
मलबा उठाने के बिलों में दिखा दिए स्कूटर के नंबर
हाउसिंग बोर्ड में सफाई और कचरा परिवहन का काम करने वाली ठेका कंपनी ने मलबा उठाने के बिलों में स्कूटर के नंबर देकर भुगतान उठा लिया। जिन नंबरों का ट्रैक्टर बताया गया वह एसीबी की जांच में स्कूटर का निकला। बाद में इसमें ठेकेदार के साथ बोर्ड के अफसरों ने एक शपथ पत्र भी दिया, जिसमें स्कूटर की बजाय ट्रैक्टर से ही मलबा परिवहन करने की बात कहते हुए भूलवश नंबर गलत लिखने की बात कही गई। बाद में बताए गए नंबर का ट्रैक्टर भी बाड़मेर निवासी व्यक्ति के नाम है।
एसीबी इस पूरे मामले की जांच कर गड़बड़ी का पता लगाने में जुटी है। पता चला कि चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में साफ-सफाई व कचरा परिवहन करने के लिए मैसर्स भगवानदास को कोटेशन के आधार पर कार्य दिया गया था। एसीबी ने पीई दर्ज करने के बाद जांच की तो आवासन मंडल की ओर से उपलब्ध करवाए गए बिलों में वाहन संख्या आरजे 19 7040 लिखा गया।
एसीबी ने जिला परिवहन अधिकारी को पत्र लिखकर इस नंबर के बारे में जानकारी मांगी। जिला परिवहन अधिकारी ने 5 मार्च 2013 को एसीबी को भेजे पत्र में उक्त नंबर का मोहनलाल पुत्र अंबालाल निवासी प्रताप कॉलोनी एयरफोर्स रोड के नाम बजाज स्कूटर होना बताया। बाद में इस बारे में भगवानदास ने 1 अप्रैल 2013 को एसीबी को पत्र देकर बताया कि ट्रैक्टर नंबर आरजे 19 आर 7040 है। बिलों में आर मानवीय भूल के कारण नहीं लिखा गया। ये ट्रैक्टर घमंडाराम निवासी गवालनाडा बाड़मेर के नाम है।
स्टे था फिर भी करवा दिया सड़क का निर्माण
राजस्थान आवासन मंडल ने सूथला गांव के खसरा नंबर 128, 129, 131 की भूमि अवाप्त की थी, लेकिन इस पर 2 मार्च 1986 से एसडीएम कोर्ट का स्टे था। इसके बावजूद मंडल के अभियंताओं ने वर्ष 2002 में 10 लाख 59 हजार की लागत में सड़क निर्माण के टेंडर निकाल दिए। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद स्टे के बारे में पता चला। इसमें ठेकेदार को 2 लाख 61 हजार का भुगतान भी कर दिया गया।
मजदूरों के पीएफ का पैसा ठेकेदार को दिया
बरकतुल्लाह खां स्टेडियम में ईस्ट वेस्ट पवेलियन के लिए 2 करोड़ 36 लाख का टेंडर निकाला। इसमें मजदूरों के लिए पीएफ कटौती अनिवार्य रूप से करने की शर्त थी, लेकिन इसकी पालना नहीं की गई। ठेकेदार के बिलों में 11 लाख रुपए की पीएफ की कटौती करने की बजाय सारा पैसा ठेकेदार को ही दे दिया।
पेड़ों को न सरकारी रिकॉर्ड में दर्शाया, न नीलामी की
अशोक उद्यान के लिए जिस समय भूमि अवाप्त की थी, उस समय 505 पेड़ों की मुआवजा राशि खातेदारों को दी। इनमें 127 गुंदे, 10 नीम, 15 खेजड़ी, 20 देशी बबूल, 3 रोहिड़ा के अलावा फलदार पौधे व इमारती लकड़ी के पेड़ शामिल थे। इन पेड़ों का न तो ऑक्शन किया और न ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्शाया। बोर्ड के जिम्मेदारों ने इन पेड़ों कटवाने के बाद उन्हें बेचकर राशि खुर्द-बुर्द कर दी।
और भी कई मामलों में भी बरती अनियमितताएं
वर्ष 2001 से 2003 में सेक्टर 15, 16 व 17 में लाइटों के रखरखाव के कार्य, सेक्टर 8 से 25 में स्ववित्त पोषित के विकास कार्य, आवासन मंडल के स्टाफ क्वार्टर की मरम्मत, अशोक उद्यान में विकास कार्य, शहर के सौंदर्यीकरण के लिए हाई मास्क लाइटें, प्लॉट आक्शन में टेंट लगाने, हुडको में रोड लाइटें लगाने, हाउसिंग बोर्ड के पार्को में बाउंडरी निर्माण कार्य, हाउसिंग बोर्ड व अन्य जगहों पर फुटपाथ निर्माण, हाउसिंग बोर्ड कार्यालयों के लिए फर्नीचर का कार्य, प्रतापनगर में विकास कार्य सहित कई कार्य मंडल के अफसरों ने बिना टेंडर निकाले ही केवल कोटेशन के आधार पर टुकड़ों में पूरे करवा लिए।
जांच चल रही है
'राजस्थान आवासन मंडल में अशोक उद्यान सहित चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में विभिन्न सेक्टरों में बिना टेंडर के कोटेशन के आधार पर ही बड़े स्तर के कार्य करवाए गए हैं। पीई दर्ज करने के बाद अब इन मामलों की जांच की जा रही है।'
नरपतसिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसीबी