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डायबिटीज मरीजों के लिए अगले साल से ब्लड शुगर लेवल की जांच लार से

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. डायबिटीज मरीजों को अगले साल से ब्लड शुगर लेवल चैक करने के लिए बार-बार खून का सैंपल नहीं देना पड़ेगा। ब्लड शुगर लेवल जांचने करने के लिए लार (थूक) का नमूना लिया जा सकेगा। इसके लिए रिसर्च शुरू होने के साथ ही काफी हद तक काम पूरा हो गया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से इस पर काम चल रहा है। संभवत: 2015 तक डायबिटीज मरीजों को लार से ब्लड शुगर लेवल चैक करने की मशीन भी मिल जाएगी।
मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान केंद्र की ओर से रविवार को शुरू हुए राजस्थान कॉन्क्लेव में भाग लेने आए काउंसिल के डायरेक्टर जनरल वीएम कटोच ने बताया कि डायबिटीज को लेकर कई संस्थाओं के साथ शोध चल रहा है। एक प्राइवेट कंपनी के साथ करार के बाद इस पर काफी काम हो चुका है। उम्मीद है कि अगले साल से डायबिटीज मरीजों को शुगर चैक करने के लिए ब्लड नहीं देना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि हाल ही में डायबिटीज के मरीजों को सस्ती दर पर जांच की मशीन और स्ट्रिप मुहैया कराए जा रहे हैं।
इसके लिए कुछ समय पहले आईआईटी बॉम्बे और बिरला इंस्टीट्यूट हैदराबाद के साथ एमओयू हुआ था। उन्होंने दो मशीन बना कर दे दी है। इससे डायबिटीज मरीजों को अब सस्ती दर पर पूरा किट मुहैया हो जाएगा। बाजार में जहां मशीन पंद्रह सौ से ढाई हजार के रुपए के बीच आती है और इसकी स्ट्रिप 18 से 22 रुपए के बीच। आईसीएमआर ने जो किट तैयार करवाई है, उसमें मशीन की कीमत 500 से 700 रुपए और स्ट्रिप की कीमत दो से तीन रुपए के बीच आएगी।
8 टेक्नोलॉजी बाजार में
आईसीएमआर ने अब तक पूरे देश के 53 मेडिकल कॉलेज और 40 लैबोरेट्री को जोड़ा है। इसके रिसर्च से अब तक 8 टेक्नोलॉजी बाजार में उतारी गई है। इनमें काला ज्वार, डायबिटीज, थैलीसीमिया, फूड इंफेक्शन, विटामिन ए और सर्वाइकल कैंसर से जुड़े प्रमुख है। जोधपुर डीएमआरसी सेंटर में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज जोड़े गए हैं, ताकि रिसर्च करने वालों को फंड व गाइडेंस मिल सके।
फोटो- वीएम कटोच