सांगरिया आरओबी शुरू हो गया है। भास्कर ने 22 सितंबर को यह जानकारी दी थी।
जोधपुर. किसी भी शहर में कोई ब्रिज बनता है तो शहरवासियों के लिए खुशी का माैका होता है। शहर की रफ्तार यकायक बढ़ जाती है। लेकिन शहर में सांगरिया रेलवे फाटक पर नवनिर्मित आरआेबी से लोगों में खुशी कम, आशंकाएं ज्यादा पैदा हो रही हैं। रविवार को आनन-फानन में खोले गए इस आरआेबी के निर्माण से लेकर शुरू करने तक जानलेवा लापरवाही रखी गई। रेलवे के फाटक बंद करने पर जिम्मेदार एजेंसियां एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल कर आश्वस्त हो गई हैं।
उधर, आरओबी शुरू होने के दूसरे ही दिन लोगों को डराने लगा है। भास्कर ने सोमवार को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरआे) की ओर से शुरू किए गए सांगरिया आरआेबी का जायजा लिया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आरओबी की डिजाइन 80 के दशक में तैयार हुई थी, ऐसे में इसे टू-लेन बनाना सबसे बड़ी आफत के रूप में सामने आया। इस ब्रिज पर चलने वाले हर शख्स व वाहन चालक के दिमाग में इसकी चौड़ाई को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे थे।
सांगरिया चौराहे के आसपास सड़क टूटी हुई थी तो सर्किल नहीं बनने से पांचों रास्ते से जंक्शन पर आने वाले वाहन ऐसे लग रहे थे, मानो अब टकराए। उधर, रेलवे ने टू-लेन आरआेबी पर ट्रैफिक डाइवर्ट होते ही रविवार दोपहर में फाटक बंद कर दी। सोमवार सुबह से ही रेलवे ने फाटक के दोनों तरफ से आ रहे रास्ते पर एक-एक गैंगमैन व आरपीएफ सिपाही को खड़ा कर दिया। रास्ते को पत्थर डालकर बंद भी कर दिया।
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