कोटा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश किशनचंद ने नाबालिग से ज्यादती के सात साल पुराने प्रकरण में आरोपी को 15 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी बहला-फुसलाकर नाबालिग लड़की को ले गया था जहां उसने उसे 15 दिनों तक रखा।
अपर लोक अभियोजक बृजराज किशोर शर्मा ने बताया कि एक व्यक्ति ने सीसवाली थाने में रिपोर्ट दी थी कि उसकी नाबालिग पुत्री को सीसवाली निवासी महावीर 24 अगस्त 2007 को बहला-फुसलाकर ले गया। इसके बाद रेलावन गांव में रखकर ज्यादती की। पीड़िता ने 15 दिन बाद मौका पाकर पिता को फोन किया और मामले की जानकारी दी।
इसके बाद पीड़िता के पिता ने पुलिस की मदद से रेलावन पहुंचकर नाबालिग को आरोपी के कब्जे से मुक्त करवाया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाहों की मौखिक साक्ष्य दर्ज करवाई गई। कोर्ट ने माना कि आरोपी नाबालिग को उसके माता-पिता के पास से अपहरण कर ले गया और गलत काम किया।
कोर्ट ने आरोपी को धारा 363 में दो साल, धारा 366 में तीन साल और धारा 376 में दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई व साढ़े सात हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अपर लोक अभियोजक ने बताया कि सभी सजाएं अलग-अलग चलेंगी।