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यूआईटी की देनदारियों ने रोका शहर का विकास

7 वर्ष पहले
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नगरविकास न्यास की इन दिनों आर्थिक स्थिति काफी खराब है। यूआईटी पर करीब 80 करोड़ की देनदारियां हैं। ऐसे में शहर में होने वाले विकास के काम नहीं हो पा रहे हैं। वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए यूआईटी के अधिकारी जुट गए हैं। यूआईटी एक नई कॉलोनी की प्लानिंग करने में लग गई है, जिससे वित्तीय हालत को सुधारा जा सके।

कांग्रेस सरकार के काम और सालभर में कोई नए आय के साधन नहीं होने से इन दिनों यूआईटी की आर्थिक स्थिति डगमगाई हुई है। यूआईटी के काम कर रहे ठेकेदारों का 30 करोड़ रुपए से अधिक के बिल बकाया हैं। इसके अलावा भी कई बड़ी देनदारियां बकाया हैं। यूआईटी नए प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पा रही है। दो साल में स्वीकृत आवासीय कॉलोनी में भी विकास नहीं हुआ। विधायकों ने भी हर वार्ड में काम करने के लिए 20-20 लाख रुपए की डिमांड कर रखी है। एक दिन पहले भी विधायक प्रहलाद गुंजल ने यूआईटी की मीटिंग ली। इसमें यूआईटी सचिव डॉ. मोहनलाल यादव ने कहा कि अभी यूआईटी पर 80 करोड़ की देनदारियां हैं, ऐसे में जनवरी से पहले कोई नया काम शुरू नहीं हो सकता।

यूआईटी ने अतिक्रमण हटाना शुरू िकया

यूआईटीने प्लाटों पर हो रहे कब्जों से अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया है। एक दिन पहले ही राजीव नगर और केशवपुरा में यूआईटी की कियोस्क के आगे हो रहे अतिक्रमणों को हटाया। अब वहां अच्छी रेट में बोली लगने के आसार हैं।

यह काम हो रहे हैं प्रभावित