कोटा। बूंदी रोड स्थित सेंटर फॉर एक्सीलेंस पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का गुरुवार को समापन हो गया। इस दौरान किसानों ने पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से
इजरायल में होने वाली संतरे की खेती की उन्नत तकनीक के बारे में जाना। वहीं इजरायल के वैज्ञानिकों ने झालावाड़ जिले के संतरा उत्पाद क्षेत्रों का दौरा कर उसकी जानकारी ली। वैज्ञानिकों ने क्षेत्र के किसानों को कम जगह में संतरे की उन्नत फसल लेने के तरीके बताए।
सेंटर फॉर एक्सीलेंस प्रभारी वैज्ञानिक राशिद खान ने बताया कि इजरायल के वैज्ञानिक डेन ब्लूफ , डॉक्टर रुबी रहबर को संतरा उत्पादक क्षेत्रों का दौरा कराया गया था। वहां उन्होंने किसानों को परंपरागत तरीके से खेती छोड़कर उसे नई तकनीक से करने के बारे में सलाह दी। वैज्ञानिकों ने पौधों की कटाई, छंटाई, पौधों के नीचे चूने से पुताई का तरीका, मदर प्लांट को विकसित करने का प्रेक्टिकल करके बताया। उन्होंने किसानों से सीधा संवाद किया। उनके साथ महाराष्ट्र के वैज्ञानिक डॉ. डीएम पंचवई, जयपुर के अतिरिक्त निदेशक उद्यान डॉ. एलएन कुमावत, संयुक्त निदेशक नर्सरी सुरेश गौतम, हरियाणा से डॉ. समर सिंह पूनिया, कोटा में संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ. रामावतार शर्मा भी थे। समारोह के अंत में कोटा सेंटर पर 60 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र बांटे गए।
कैसे होती है इजरायल में खेती
इजरायली वैज्ञानिकों के अनुसार वहां पर एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच दूरी बहुत कम रखी जाती है। जैसे भारत में 6 गुणा 6 की दूरी होती है। वहीं इजरायल में 5 गुणा 3 की दूरी होती है। दूरी का मापदंड इस हिसाब से रखा जाता है कि पौधे की कटाई-छंटाई आसानी से हो सके। सिंचाई ड्रिप सिस्टम से होती है। इसके अलावा फर्टिलाइजर कौनसा और कब डालना चाहिए। इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। वहां पैदा होने वाले संतरे रोग रहित होते हैं। साथ ही कम जगह में अधिक फसल लेने की काबिलियत तो है ही, लेकिन एक्सपोर्ट क्वालिटी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इतना ही नहीं वहां पर संतरे की एक नहीं अनेक वैरायटी होती हैं।