पहले पिता, अब बेटे ने की आंखें दान
नेत्रदान की मिसाल बना लोढ़ा परिवार
कोटा|जिससमय कोटा में नेत्रदान की बात करना भी आश्चर्य हुआ करता था, उस समय वर्ष 1992 में जुहार मल लोढ़ा ने अपने नेत्रदान का जिम्मा पुत्र को सौंपा। पुत्र केसरीमल लोढ़ा ने उनका नेत्रदान करवाया और दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। अब केसरीमल का देहांत हुआ तो इसकी सूचना लायनेस अनीता ने संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन को दी। तब डॉ. कुलवंत गौड़, आईं बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के तकनीशियन महेंद्र यादव ज्योति मित्र प्रमोद अग्रवाल ने घर पर पहुंचकर कॉर्निया प्राप्त किया।
गुरुवार को संस्था के डॉ. कुलवंत गौड़ ने उनकी प|ी पुष्पा लोढ़ा पुत्र विकेश लोढ़ा को इस पुनीत कार्य में सहयोग के लिए सम्मान पत्र दिया। इसके साथ ही वहां उपस्थित लोगों को नेत्रदान से संबंधित सभी भ्रांतियों को दूर किया गया। 72 वर्ष के होने पर भी केसरीमल स्वयं अपना काम किया करते थे। उन्होंने बच्चों, पोतों को भी मरणोपरांत नेत्रदान करवाने के लिए तैयार कर रखा था।
नेत्रदान पर परिजनों काे प्रशस्ति पत्र देते हुए।