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बारिश का पानी प्रदूषित कर दिया थर्मल ने, 4 साल से हो रही थी रिसर्च
थर्मल के अधिकारी अब भी नकार रहे
पांच जोनों में बांटा शहर, मिला आयरन, लैड और कैडमियम
कोटामें बारिश का पानी प्रदूषित हो गया है। इसका एक बड़ा कारण कोटा थर्मल से निकलने वाली गैसें हैं। बारिश के पानी में न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से लेकर फेफड़ों की बीमारियां पैदा करने वाले मैटल्स मिले हैं। पानी में मिले पीएच का स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा तय मानदंड से अधिक हैं। बरसाती पानी एसिडिक हो रहा है। स्टेशन क्षेत्र और कुन्हाड़ी-नांता क्षेत्र में पीएच स्तर 5.6 से भी ऊपर है। ऐसा होने पर अम्लीय बरसात की आशंका बढ़ जाती है। कोटा सुपर थर्मल पावर के नजदीकी क्षेत्र में बरसाती पानी में हैवी मैटल्स अधिक मिले हैं। कोटा गवर्नमेंट कॉलेज के केमिस्ट्री विभाग की लेक्चरर मंजू मीणा की चार साल की रिसर्च के बाद शहर के वातावरण की यह चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। रिसर्च की मेन गाइड कोटा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर आशु रानी और को-गाइड गवर्नमेंट कॉलेज की लेक्चरर उत्तरा चंद्रावत थीं। लेक्चरर भरत सिंह मीणा का भी सहयोग रहा। औद्योगिक प्रदूषण और वाहनों से निकलने वाले कार्बन-डाई-ऑक्साइड को इस प्रदूषण का कारण बताया गया है। रिसर्च के लिए शहर को पांच जाेनों में विभाजित कर 2011 में सैंपल इकट्ठे किए गए।
रिसर्च लैब में काम करती लेक्चरर मंजू मीणा और उत्तरा चंद्रावत।
^रिसर्च के जरिए फ्लाई ऐश का शहर पर पड़ रहे असर का पता चल पाया है। इतने फैक्ट्स पहले कभी एकत्रित नहीं किए गए हैं। कोटा के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण रिसर्च है। -प्रो.आशु रानी, हैडऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमेस्ट्री डिपार्टमेंट, कोटा यूनिवर्सिटी
^एसओएक्स और एनओएक्स की कोई लिमिट नहीं होती। थर्मल की चिमनियों की हाइट बिलकुल सही है। रिसर्च के बिंदु और इन्वेस्टिेगेशन देखकर ही निष्कर्ष पर पहुंच जा सकता है। -राजीवपारीक, क्षेत्रीयप्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, कोटा
^हैवी मैटल्स निकलने पर धुंआ काला होता है, ऐसा अभी नजर नहीं आया है। केंद्र और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मॉनिटरिंग करता है। गवर्नमेंट कॉलेज हमको रिसर्च रिपोर्ट भेजता है तो उसे और रिसर्च की प्रक्रिया की स्टडी करके हमारे केमिस्ट विभाग से चर्चा की जाएगी। -रविगोयल, चीफइंजीनियर, कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट, कोटा
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