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ऑडिटोरियम तो केवल पत्थर की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा तो रंगकर्मियों से ही होगी

7 वर्ष पहले
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ऑडिटोरियमअभी केवल पत्थर की मूर्ति है, इसमें प्राण प्रतिष्ठा तो तभी होगी, जब रंगकर्मी इसके मंच पर चढ़ेंगे। प्रदेश के सबसे महंगे ऑडिटोरियम को लेकर रंगकर्मियों की तीखी प्रतिक्रिया आई है। उनका कहना है कि यदि यूआईटी नहीं चेती तो 14.50 करोड़ रुपए लागत से बने ऑडिटोरियम का हाल भी कंडम हो चुकी सिटी बसों जैसा हो जाएगा।

ऑडिटोरियम से खर्चा कैसे निकलेगा, इसकी प्लानिंग यूआईटी ने नहीं की। इसके संचालन के लिए जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक यूआईटी अधिकारियों के साथ कलाकारों और रंगकर्मियों की कमेटी बननी चाहिए। जो इसके संचालन संबंधी नियम, किराया तय करे। यह निष्कर्ष और सुझाव आए दैनिक भास्कर की ओर से ऑडिटोरियम के मुद्दे पर हुए टॉक शो में। वरिष्ठ और नवोदित कलाकारों तथा रंगकर्मियों का कहना था कि बिना नाटक आयोजित किए ऑडिटोरियम किसी हाल में नहीं चल सकता। भास्कर ने मंगलवार को \\\"इतना महंगा ऑडिटोरियम कि सालभर में कलाकार झांकने तक नहीं आए\\\' समाचार से कोटा के रंगकर्मियों की पीड़ा का उजागर किया था।

^यूआईटी हमारे नाटकों को प्रायोजित करे। अभी हमारे नाटकों का शो हाउसफुल जाता है। रिहर्सल के सीमित संसाधनों के बावजूद लोग कोटा के कलाकारों को पसंद कर रहे हैं। -हितेशकुमार, पीआरओ,पैराफिन संस्था

नामकरण कलाकार के नाम पर हो

^यूआईटीके ऑडिटोरियम का नामकरण किसी कलाकार के नाम पर होना चाहिए। रंगमंच खतरे में पड़ा या कलाकारों की प्रतिभा के साथ कोई खिलवाड़ किया गया तो हम सड़कों पर उतने से भी नहीं हिचकिचाएंगे। -रोहनशर्मा, एक्टरपैराफिन, अब्दुल सलीम, सुभाष कला संगम और हरीश महावर, निदेशक, सुभाष कला संगम

{ शहर के रंगकर्मियों को साल में 12 शो फ्री करने दिए जाएं।

{ रिहर्सल फ्री रहे। 12 शो के बाद आयोजित होने वाले शो का न्यूनतम किराया तय हो।

{ साल में दो थिएटर फेस्टिवल हों।

{ रंगकर्मियों के लिए सालभर का कैलेंडर बनाया जाए।

{ थिएटर से संबंधित कॉम्पटीशन आयोजित हो।

{ विश्व रंगमंच दिवस पर बड़ा आयोजन हो।

बस! बन रहा था तब देखा था...

^ऑडिटोरियमजब बन रहा था तब ही देखा था। हाल देखिए कि इसके उद्‌घाटन तक में किसी रंगकर्मी को आमंत्रित नहीं किया गया। यहां परफॉर्म करने की बात ताे दूर है। यूआईटी की कलाकारों में और ऑडिटोरियम के संचालन में कोई रुचि नहीं है। -अश्वत्थामादाधीच, सचिवऔर रंगकर्मी, रंगसंप्तक

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