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संतान योग्य नहीं तो संपत्ति किस काम की: पं. मेहता
जीवन में सुख और दुख दो पतवार की तरह है। नाव केवल एक पतवार से आगे नहीं बढ़ सकती। आजकल माता-पिता बच्चों को इतनी सुविधाएं दे रहे हैं कि संघर्ष सामने आते ही वे कांपने लगते हैं। संतानों को योग्य बनाना आज सबसे बड़ी चुनौती है।
बच्चों की समस्याओं का समाधान करने के लिए हमें अपने भीतर झांकना होगा। यह बातें प्रख्यात जीवन प्रबंधन गुरू पं. विजय शंकर मेहता ने शनिवार को दैनिक भास्कर के मोटिवेशनल सेमिनार में कही। श्रीनाथपुरम स्थित माहेश्वरी पब्लिक स्कूल सभागार में ऑर्ट ऑफ पैरेंटिंग पर उन्होंने कहा कि अथाह संपत्ति अर्जित करने के बाद भी हमारी संतान योग्य नहीं है तो इससे बेकार जीवन दूसरा नहीं हो सकता। बच्चों को यह सिखाएं कि जब प्रतिकूलता या संघर्ष आए तो जीवन से नाता नहीं तोड़ें, साहस से उसका सामना करें। उन्होंने प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि परिवार में सुख-दुख चार जगह से आते हैं। पहला संसार से, दूसरा संपत्ति से, तीसरा स्वास्थ्य से और चौथा संतान से। संतान से आया दुख हमें तोड़ देता है। इसलिए उन्हें सिखाएं कि भगवान पर भरोसा बनाए रखें। अपने भीतर ललक (पैशन) बनाए रखें। शिकायत चित्त को विराम दें। परेशानी आने पर थोड़ा मौन साध लें। प्रत्येक दिन एक अच्छा संकल्प अवश्य करें।
इन्होंनेबढ़ाई गरिमा
सेमिनारमें कोटा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. मधुसूदन शर्मा, जलसंसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर एके गर्ग, बंसल क्लासेस के सीएमडी वीके बंसल, एलेन के निदेशक राजेश माहेश्वरी, ग्रामीण एएसपी विजय स्वर्णकार, माहेश्वरी समाज कोटा के अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला, महासचिव बिट्ठल दास मूंदड़ा सहित कई गणमान्य नागरिक अधिकारी मौजूद रहे। इससे पहले आयोजन में सहयोगी कलाल समाज के अध्यक्ष एसएन मेवाड़ा, बालाजी इवेंट कंपनी के प्रेसीडेंट, पिक्सेल के सुनील बाफना, मासूम एग्रो एनर्जी प्रॉडक्ट के मोहम्मद मियां, डीजे आईआईटी फिजिक्स के दिनेश जैन, होटल लेजर इन के सुमित चतुर्वेदी और प्रिंसिपल डॉ. वंदना सिंघल ने पं. मेहता का स्वागत किया।
शांति के लिए चार जरूरी बातें ऐसे समझें
परिवार के लिए उपयोगी सूत्र
{हैसियतसे बाहर जाकर मौजमस्ती करने की बजाय बच्चों को जरूर अच्छा पढ़ाओ।
{20 करोड़ अश्लील वीडियो हैं इंटरनेट पर। बच्चों को इनसे दूर रहने की सीख दें।
{संतान को नीति से पालोगे तो ध्रुव बनेंगे, रूचि से पाला तो बर्बाद हो जाएंगे।