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सुंदरता के लिए कई लोग कराते हैं राइनो प्लास्टी
नाकका स्वरूप जन्मजात, चोट आैर संक्रमण के कारण बिगड़ता है। 50 प्रतिशत लोग सुंदरता की वजह से राइनो-प्लास्टी करवाते हैं। नाक का आकार बिगड़ने पर श्वास लेने में भी दिक्कत होती है। यह बात मेडिकल कॉलेज के एनाटोमी विभाग और आनंदम ईएनटी हॉस्पिटल की ओर से दो दिवसीय राइनो-प्लास्टी पर आयोजित वर्कशॉप में सामने आई।
दूसरे दिन वर्कशाप में शामिल करीब 62 डॉक्टर्स को चार लाइव सर्जरी दिखाकर राइनो-प्लास्टी से संबंधित जानकारी दी गई। चारों ऑपरेशन युवाओं के ही थे। पहला ऑपरेशन क्रूकेड नोस (टेढ़ी नाक) का ऑपरेशन किया। दूसरा ऑपरेशन गुवाहटी से आए इंजीनियरिंग स्टूडेंट का हुआ। संक्रमण की वजह से रोगी नाक गलने से चपटी हो गई थी। तीसरा ऑपरेशन भवानीमंडी के युवक का हुआ। क्रिकेट बॉल की चोट के कारण युवक की नाक का आकार बिगड़ गया था। चौथा ऑपरेशन बूंदी के इंजीनियरिंग स्टूडेंट का हुआ। इसकी नाक की लंबाई अधिक थी। एक ऑपरेशन में करीब ढाई घंटे का समय लगा। ऑपरेशन के लिए ऑस्टियोटोमी अन्य तकनीकी उपयोग की गई। ऑपरेशन वीरेंद्र घैंसास उनकी टीम ने किए। मेडिकल कॉलेज एनाटोमी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिमा जायसवाल ने भी कार्यशाला के संबंध में विचार रखे। डॉ. विक्रांत माथुर ने सभी को धन्यवाद दिया।
राइनो प्लास्टी वर्कशाॅप में आनन्दम अस्पताल में लाइव आॅपरेशन देखते डॉक्टर्स।