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यूरिया का कट्टा 400 रुपए में बिक रहा है गांवों में
कोटा| गांवोंमें 400-400 रुपए में बेचा जा रहा है यूरिया का कट्टा। अधिकारियों से शिकायत की तो उन्होंने कहा कि आपको चाहिए तो बताओं सरकारी दुकान से दिलवा देता हूं। यूरिया की कालाबाजारी का मुद्दा रविवार को जिला परिषद की बैठक में सदस्य सीताराम मेघवाल ने उठाया तो सांसद ओम बिरला ने इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर जोगाराम को तत्काल ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए।
बैठक में चंद्रकांता मेघवाल ने पूछा कि कोटा में पर्याप्त यूरिया क्यों नहीं रहा है। यहां पर सख्ती की तो सरकारी दुकानों पर यूरिया आना ही बंद कर दिया। प्राइवेट लाइसेंसी को पूरा यूरिया दिया जा रहा है। सांसद बिरला विधायक हीरालाल नागर ने भी इस पर कड़ी नाराजगी जताई और कृषि विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा। इस पर कृषि अधिकारी आरके सिंह ने कहा कि 784 टन यूरिया रहा है वो कोटा के लिए ही होगा। बांटने में जो परेशानी रही है उसे दिखवाया जाएगा। जिला परिषद सदस्य ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि कृषि विभाग की लापरवाही के कारण किसान बर्बाद हो गया, इन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सांसद बिरला ने कहा कि अब यूरिया का जो भी रैक आए उसकी सूचना जिला परिषद सदस्य को दी जाए और अधिकारियों की मौजदूगी में उसे बंटवाया जाए।
रैफरटू कोटा, नियम बन चुका है
बैठकमें सुरेंद्र परिहार ने कहा कि जिले की डिस्पेंसरियों में डॉक्टर इलाज ही नहीं करना चाहते हैं। सीधे मरीज के आते ही रैफर टू कोटा लिखकर रवाना कर देते हैं। इस रैफर टू कोटा को तो उन्होंने स्लोगन की तरह रट रखा है।
दुर्भाग्यहै 6-6 महीने में होती है बैठक
बैठककी शुरूआत में ही ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि जो बैठक 3 माह में होनी चाहिए, वह 6-6 माह में होती है। बैठक ही जब समय पर नहीं होगी तो अधिकारी क्या ध्यान देंगे। सरकारी एजेंसियां अकर्मण्य हो चुकी हैं। ऐसे में ये बैठक मजाक बन चुकी है। इटावा प्रधान मानवेंद्र सिंह ने कहा कि अधिकारियों को कुछ पता ही नहीं होता है। वो जवाब क्या देंगे।