सबसे बड़ी लूट में 6 को सजा, 3 बरी
सर्राफदंपती ओम एवं माधुरी जैन के साथ छह साल पहले हुई 81 लाख की लूट के मामले में कोर्ट ने बुधवार को मुख्य आरोपी उसके साथी को सात-सात साल और अन्य चार आरोपियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। वहीं, मुख्य आरोपी के मां-बाप सहित 3 को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
विशिष्ट न्यायाधीश महिला उत्पीड़न एवं दहेज प्रकरण न्यायालय के जज दीपचंद जोशी ने मामले में मुख्य आरोपी अजय शर्मा और कादिर खान उर्फ गुप्ता को डकैती और लूट के अपराध में सात-सात साल की सजा सुनाई है। शकील अहमद, सुरेश कुमार, कदीर अहमद और अब्दुल वदूद को लूट का माल खरीदने के अपराध में तीन-तीन साल की सजा दी है। जबकि आरोपी कृष्ण प्रकाश शर्मा, उनकी प|ी मंजू शर्मा और सत्य उर्फ सत्यप्रकाश उर्फ सत्यदेव को बरी कर दिया।
एक आरोपी मुन्ना फरार है और नसीम जावेद की दो साल पहले ट्रेन से गिरने से मौत हो गई थी। कोर्ट का फैसला आते ही दंपती के चेहरे खिल गए। उन्होंने कहा कि वे बेकसूर थे, उन्हें पुलिस ने गलत फंसाया, जो आज के फैसले ने साबित कर दिया। लोक अभियोजक केके शर्मा का कहना था कि पुलिस केस में ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। आरोपी छह साल से लगातार जेल में हैं और अब उनकी एक साल की सजा और भुगतनी है।
यहथा मामला
10अक्टूबर 2008 को पौने 10 बजे इंद्र विहार निवासी सर्राफ ओम जैन के घर में दो जने घुसे और उनकी प|ी माधुरी जैन पर पिस्तौल तान दी और बैग और ब्रीफकेस छीन लिया। बैग और ब्रीफकेस में करीब 81 लाख के जेवरात और नकद 90 हजार थे। पुलिस ने करीब 78 लाख के जेवरात बरामद कर लिए। कोर्ट ने इसे डकैती नहीं माना और लूट, जान से मारने की कोशिश, लूट का सामान रखने के मामले सभी आरोपियों को दोषी माना। बचाव पक्ष के वकीलों और विशिष्ट लोक अभियोजक केके शर्मा ने अंतिम बहस में अपना-अपना पक्ष रखा।
जांच में पुलिस ने बरती लापरवाही, चार्जशीट में भी कमियां होने की वजह से भी साक्ष्य हुए कमजाेर