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इस बार एक ही मंच पर होगी रामलीला रामकथा

7 वर्ष पहले
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दशहरेमेले से पूर्व नगर निगम रामकथा और रामलीला का आयोजन करवाता है। पहले ये दोनों ही कार्यक्रम श्रीराम रंगमंच पर होते थे, लेकिन रामकथा के प्रति रुझान कम होने लगा। जनता को इससे जोड़ने के लिए निगम के इस बोर्ड ने नई परंपरा शुरू की थी। रामकथा का आयोजन हर साल अलग-अलग मंदिरों में करने का निर्णय लिया था। दो साल तक तो ये व्यवस्था चली, लेकिन इस साल निगम ने ये परंपरा तोड़ दी। इस बार दोनों ही कार्यक्रम पहले की तरह श्रीराम रंगमंच पर होंगे।

श्रीराम रंगमंच पर सुबह तो रामकथा का आयोजन होगा और उसके कुछ देर बाद रामलीला के लिए मंच तैयार किया जाएगा। इससे रामलीला के मंच संचालन सजावट में काफी परेशानी आती है। इस साल मेला समिति ने बिना किसी की राय जाने ये निर्णय ले लिया कि दोनों कार्यक्रम एक ही मंच पर किए जाएं। यहां तक कि मेला समिति के कई सदस्यों तक को इसकी जानकारी नहीं है। नेता प्रतिपक्ष मेला समिति सदस्य बृजमोहन सेन का कहना है कि ये निर्णय समिति ने कब लिया इसकी कोई मुझे भी कोई जानकारी नहीं हैं। मुझे तो मंगलवार को ही इसकी जानकारी मिली। अलग-अलग मंदिरों में रामकथा होने से उस क्षेत्र की जनता का जुड़ाव तो होता ही था।

उपसमितियांभी नहीं बनाईं

मेलेमें सभी पार्षदों अधिकारियों को जोड़ने तथा मेला समिति के काम को बांटने के लिए हर साल निगम द्वारा उपसमितियां बनाई जाती थीं। हर कार्यक्रम और व्यवस्था के लिए एक उपसमिति बनती थी जिसमें 4 या 5 पार्षद तथा एक निगम अधिकारी को सचिव की हैसियत से शामिल किया जाता था। ये उपसमितियां कार्यक्रम व्यवस्था के लिए निर्णय लेने से लेकर उन्हें पूरा करवाने तक में पूरा सहयोग करती थीं। इस साल नगर निगम की मेला समिति अधिकारियों ने अकेले ही सारे कार्यक्रम व्यवस्था तय कर ली। उपसमितियां बनाना तो दूर पार्षदों को पूछा तक नहीं। इससे कांग्रेस के ही पार्षदों में काफी रोष है।

पार्षदोंको राय देने से मना नहीं किया

^इसबार आचार संहिता और फिर समिति की बैठक पर रोक लगने के कारण काफी समय खराब हो गया था। जब प्रतिबंध हटा तब समय कम बचा था और काम अधिक था। इसलिए उपसमितियां नहीं बनाई गई। पिछले साल की ही समितियां बनी हुई हैं। पार्षदों को राय देने सहयोग करने के लिए मना नहीं किया।

-आनंद पाटनी, अध्यक्षमेला समिति