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हर रोग की दवा नहीं है एंटीबायटिक: डॉ. बंसल
हररोग का इलाज एंटीबायटिक नहीं है, सामान्य खांसी-जुकाम, दस्त के उपचार में इस दवा का कोई स्थान नहीं है। बिना डॉक्टर की पर्ची के एंटीबायटिक दवाओं का सेवन करें। एंटीबायटिक के दुरुपयोग के खिलाफ भारतीय शिशु अकादमी ने एंटीबायटिक जनजागरण सप्ताह शुरू किया है जो 5 अक्टूबर तक चलेगा। सोमवार को इस बारे में भारत विकास परिषद अस्पताल के केमिस्टों की मीटिंग में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश बंसल ने बताया कि बिना डॉक्टर की पर्ची के एंटीबायटिक दवा दी जाए।
उन्होंने कहा कि एंटीबायटिक का अधिक उपयोग, तर्क रहित कॉम्बिनेशन के प्रयोग से देश में ही नहीं विश्वभर में दवाई बेअसर हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि वह दिन दूर नहीं जब साधारण संक्रमण भी जानलेवा सिद्घ हो जाएगा। टीबी, निमोनिया एवं दस्त के कीटाणु पर एंटीबायटिक प्रभाव कम हो रहा है। लगभग 40 प्रतिशत प्रभाव कम हुआ है। नई एंटीबायटिक के बराबर रही हैं क्योंकि एक नई एंटीबायटिक को बनाने के 12 से 18 वर्ष का समय लगता है। साथ ही करोड़ों डालरों का खर्चा आता है। उनका कहना था कि एंटीबायटिक दवाइयां अब अनेक रोगों पर बेअसर हो रही हैं। इससे मृत्यु दर भी बढ़ रही है। विश्व में प्रतिवर्ष 4.5 लाख मरीजों पर टीबी की दवा बेअसर हो रही है। इसके कारण 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है।