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निर्भीक होकर बोलते थे औदिच्य

7 वर्ष पहले
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पार्टीमें कोई स्पष्ट बात करने की हिम्मत करता था तो वह थे हरिकुमार औदिच्य। कभी लाग लपेट नहीं करते थे, जो कहना होता मुंह पर और खुलकर कहते, यह भी नहीं सोचते थे की इसका नतीजा क्या होगा। यह कहना है उनके साथ बरसों तक काम करने वाले वरिष्ठ नेता प्रो. ललित किशोर चतुर्वेदी का।

हरिकुमार औदिच्य का जन्म कोटा में हुआ। यहां वे देवता की हवेली में रहते थे। उन्होंने कोटा में ही राजकीय महाविद्यालय से बीए एलएलबी किया। 1946 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रवेश कर लिया। कोटा नगर में जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने। 1952 में कोटा नगर जनसंघ मंत्री बने, 1953 में कश्मीर आंदोलन में कोटा के जत्थे का नेतृत्व किया। तीन माह तक फिरोजपुर जेल में रहे। 1955 में वे राजकीय महाविद्यालय के अध्यक्ष बने। 1959 से 1972 तक नगर निगम के सदस्य बने, कई उपसमितियों के अध्यक्ष जनसंघ के नेता रहे। 1975 से 1977 तक मीसा बंदी के रूप में 19 माह जेल में रहे। 1977 से 1980 तक वे नगर विकास न्यास के अध्यक्ष, 1980 से 1985 तक भाजपा के मंत्री, 1985 से 1990 तक विधानसभा के सदस्य और विधायक दल के सचिव रहे। 1990 से 1992 तक भैरोसिंह शेखावत की कैबिनेट में शिक्षामंत्री रहे।

इसके अलावा उन्होंने हर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभाई। औदिच्य राष्ट्रीय स्थानीय मुद्दाें पर अनेक बार जेलयात्रा, विशेष रूप से कच्छ आंदोलन, गो वध विरोधी आंदोलन, गोवा मुक्ति आंदोलन, गदरा रोड आंदोलन राम जन्मभूमि आंदोलन में जेल गए। चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने सारा जीवन निष्कलंक व्यतीत किया। पार्टी के प्रति हमेशा समर्पित रहे। कभी भी अपनी बात कहने में संकोच नहीं करते थे। यही कारण है कि उनके मित्र केवल भाजपा में ही नहीं बल्कि दूसरे दलों में भी थे।

2001 में सकतपुरा स्थित जवाहरलाल नेहरू शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में देवता श्रीधर लाल की मूर्ति के अनावरण के अवसर पर तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के साथ हरिकुमार औदिच्य, साथ में पूर्व महाराव बृजराजसिंह, महाराज कुमार इज्यराजसिंह, पूर्व मंत्री भुवनेश चतुर्वेदी।

हरिकुमार औदिच्य।