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लीज पर नहीं किराए पर सर्विस टैक्स है

7 वर्ष पहले
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कोटा| करसलाहकारों और सीए ने भामाशाह अनाज मंडी में आढ़तियों पर सर्विस टैक्स की डिमांड को अनुचित बताया है। क्योंकि सर्विस टैक्स किराए पर लगता है, कि लीज पर। मंडी के सभी आढ़तिए वर्तमान में दुकानों के मालिक हैं और लीज होल्डर हैं।

एक्साइज एवं सर्विस टैक्स विभाग ने कृषि उपज मंडी समिति से सात साल का बकाया सर्विस टैक्स 72 लाख रुपए वसूला था। इसमें 1.83 लाख थोक फल-सब्जी मंडी समिति का भी शामिल है। जिसकी वसूली के लिए मंडी समिति ने आढ़तियों को डिमांड नोटिस जारी कर रखी हैं। कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के महामंत्री अविनाश राठी ने बताया कि मंडी समिति 2007 से पिछले सात साल का सर्विस टैक्स मांग रही है। जबकि 2009 से मंडी के सभी आढ़तिए दुकानों के मालिक हैं, दुकानें लीज पर हैं। जिन पर सर्विस टैक्स बनता ही नहीं है। इस मामले में उन्होंने मंडी के टैक्स सलाहकार और सीए से भी सलाह ली थी, जिसे उन्होंने भी गलत ठहराया था। इसके बावजूद मंडी प्रशासन इस वसूली पर अड़ा हुआ है।

उन्होंने बताया कि मंडी समिति ने एक्साइज एवं सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील कर रखी है। इसके पहले विभागीय अपील में मंडी समिति हार चुकी है। उनका कहना है कि जब तक ट्रिब्यूनल का फैसला नहीं जाता तब तक वसूली स्थगित रखी जानी चाहिए। इसके बाद भी विभाग के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है। उन्होंने मंडी सचिव को यहां तक तर्क दिया कि वह लाखों रुपए कीमत की दुकानें लेकर बैठे हैं। उन पर सर्विस टैक्स बनता ही नहीं है।

सीए डीसी जैन ने बताया कि पहले रीको भी उद्यमियों से सर्विस टैक्स वसूलता था, लेकिन इस बार उसने भी नहीं वसूला। उन्होंने बताया कि सर्विस टैक्स के प्रावधानों में किराए पर सर्विस टैक्स है, लीज पर नहीं है। इसलिए कोई भी विभाग या समिति इसकी वसूली करता है तो गलत है।