कोटा। एमबीएस अस्पताल के एंटी गैस गैंगरीन इंजेक्शन घोटाले में एक और नई जानकारी सामने आई है। आरटीआई में इस पूरे घपले की परतें खुल रही हैं। ताजा आरटीआई में जानकारी मिली है कि मार्च, 2013 से लेकर जून, 2014 तक 110 एंटी गैस गैंगरीन इंजेक्शन खरीदे गए थे, जबकि इस अवधि में गैंगरीन के मात्र दो ही रोगी भर्ती हुए।
गौरतलब है कि अगस्त व सितम्बर, 2014 में खरीदे गए 50 इंजेक्शन का मामला पहले ही बेपर्दा हो चुका है। इसमें संभागीय आयुक्त व एसीबी के स्तर पर जांच चल रही है। शिकायतकर्ता अभिनव राजस्थान के सदस्य नयापुरा निवासी महेश मेघवाल ने बताया कि अब तक 160 इंजेक्शन का घपला सामने आ चुका है। इनकी कीमत करीब 26 लाख रुपए बैठती है। सारे तथ्य सामने आने के बावजूद सभी लोग उन्हीं पदों पर बैठे हुए हैं, जहां बैठकर उन्होंने इस परचेज फिक्सिंग को अंजाम दिया, ऐसे में तथ्य खुर्दबुर्द हो सकते हैं।
सूचना भी गोलमाल
मेघवाल की ओर से सूचना के अधिकार के तहत ली गई सूचना में सामने आया है कि वर्ष 2013 में 1 मार्च को 10 व 2 मार्च को 50 तथा वर्ष 2014 में 1 फरवरी को 10, 23 अप्रैल को 20, 30 जून को 20 तथा 5 अगस्त को 20 व 18 सितम्बर को 30 एंटी गैस गैंगरीन इंजेक्शन खरीदे गए। इनकी सप्लाई भी क्रय आदेश जारी होने के तत्काल बाद होती रही। इंजेक्शनों की खपत कहां हुई, इस बारे में अस्पताल प्रशासन ने आरटीआई में कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी। बल्कि काउंटरों के वाउचर बताकर इतिश्री कर दी।
खुल रही घोटाले की परत
वहीं, शनिवार को खुलासा हुआ था कि एमबीएस प्रशासन ने सितम्बर, 2014 की एक्सपायरी के ही 10 इंजेक्शन मार्च, 2013 में भी खरीदे थे। लेकिन 9 इंजेक्शन एक्सपायरी नजदीक बताते हुए फर्म को वापस लौटा दिए गए थे। बाद में सितम्बर में यही इंजेक्शन दोबारा खरीद लिए गए।
50 इंजेक्शनों की जांच में शामिल होंगे नए तथ्य
उधर, पूर्व में सामने आ चुके 50 इंजेक्शनों के घपले में एसीबी जांच कर रही है। एसीबी के एएसपी देवेन्द्र शर्मा ने बताया कि तीन दिन पहले ही एमबीएस अस्पताल प्रशासन से इस मामले का पूरा रिकॉर्ड मिला है। जो भी नई जानकारियां सामने आ रही हैं, उन्हें भी जांच में शामिल कर लेंगे।