कोटा। ‘हम यहां कचौरी जलेबी खाने नहीं आते हैं। विगत चार साल से हर बार विभिन्न मुद्दों को लेकर अधिकारियों को अवगत कराया जाता है, लेकिन अधिकारी अपनी मनमानी करते हैं। किसी भी मामले में परियोजना समिति के सदस्यों की राय नहीं ली जाती है। ऐसे में समिति के होने का कोई मतलब नहीं है।’ यह बात चंबल परियोजना समिति की बैठक में सदस्यों की ओर से अधिकारियों को कही गई। समिति की बैठक मंगलवार को सीएडी सभागार में सभापति सुनील गालव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। सभापति के नेतृत्व में सभी सदस्यों ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और मनमानी का आरोप लगाते हुए संभागीय आयुक्त को सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया।
सभापति सुनील गालव ने कहा कि विगत चार सालों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन हमारे उठाए एक भी मुद्दे का समाधान नहीं हो पाया है। रेगुलेशन का सारा पैसा अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों में जा रहा है। रेगुलेशन के 90 फीसदी पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। सभी सदस्य वोट लेकर किसानों के प्रतिनिधि के रूप में यहां बैठे हैं। किसान क्षेत्र में जवाब मांगते हैं। यदि समितियों को बजट और अधिकार नहीं मिलते हैं तो इस्तीफे देकर सड़कों पर उतरना पड़ेगा। अधिकारियों के झगड़े का खामियाजा भी किसानों को उठाना पड़ रहा है। इस दौरान कुलदीप सिंह, रामकिशन गुर्जर, मथुरालाल गुर्जर, सुनील गालव, कुलदीप सिंह, कमरूद्दीन, एसएस प्रतिहार, बीएल तेजावत, एचएस मीना उपस्थित थे।
निर्माण कार्यों की जांच के लिए ‘थर्ड पार्टी’
बीएम तेजावत ने बताया कि नहरी तंत्र पर कराए जाने वाले सभी कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य सरकार की ओर से थर्ड पार्टी के रूप में इंजीनियरिंग कॉलेज को नियुक्त किया गया है। वहीं, 1274 करोड़ के कार्यों की जांच के लिए भी राज्य सरकार ने कमेटी का गठन कर दिया है। इस पर सदस्यों ने आपत्ति जताई।