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नाम के सब डिवीजन ने और बढ़ा दीं उपभोक्ताओं की परेशानियां

7 वर्ष पहले
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सरकारआमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए योजनाएं बनाती है, कुछ लागू भी होती हैं, लेकिन विभागीय खामियों के कारण लोगों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता। कुछ ऐसा ही हो रहा है नए कोटा की कुछ कॉलोनियों के निवासियों के साथ। जयपुर डिस्कॉम ने नए कोटा में सब डिवीजनों को अलग कर चालू तो कर दिया, लेकिन एक साल बाद भी लोगों को पुराने ऑफिसों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं के बिल अभी भी पुराने सब डिवीजन पर बन रहे हैं। ऐसे में बिल की खामियों, बिल जमा कराने सहित अन्य समस्याओं के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है।

जयपुर डिस्कॉम के सब डिवीजन ए-1, 2 और 5 के सब डिवीजन को अलग किया था। इसमें रंगबाड़ी, गणेशनगर, राजीवगांधी नगर, महावीरनगर द्वितीय और तृतीय को शामिल किया है। इन सभी कॉलोनियों को सब डिवीजन ए-6 में मिला दिया था। लोगों की सुविधा को देखते हुए यह कदम उठाया था। उस समय कहा गया था कि नए सब डिवीजन में लोगों को एक स्थान पर ही सुविधाएं मिलने लगेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। 365 दिन से भी ज्यादा दिन बीतने के बाद भी लोग नए सब डिवीजन से निराश होकर लौट रहे हैं।

आरकेपुरम डिस्कॉम दफ्तर में बिजली के बिल जमा कराने के लिए महिलाएं घर का चूल्हा-चौका छोड़कर कतार में लगी रहीं।