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बच्चों को दिए गए संस्कार बनते हैं बुढ़ापे की लाठी

7 वर्ष पहले
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कोटा| बच्चोंको बचपन में प्यार, स्नेह के साथ-साथ सेवाभाव और संस्कार देने की बहुत आवश्यकता है। बड़ों द्वारा बचपन में बच्चों को दिए गए संस्कार ही उनके बुढ़ापे की लाठी बनते हैं। यह कहना है कथा वाचक आचार्य कैलाशचंद तेहरिया का। वे गुरुवार को रामचंद्रपुरा छावनी में चल रही भागवत कथा में प्रवचन दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि हम बच्चों को सुविधाएं तो सभी दे देते हैं, लेकिन संस्कार नहीं डाल पाते। यही वजह है कि संस्कार विहीन सुविधाएं आगे जाकर उनके पतन का कारण बन जाती है और हम दुखी हो जाते हैं। कथा वाचक ने कथा में कपिल संवाद, पार्वती चरित्र, ध्रुव और प्रह्लाद चरित्र आदि का वर्णन किया। आयोजक हेमराज सिंह गौड़ ने बताया कि यहां शुक्रवार को दोपहर 12 से शाम 4 बजे कथा का वाचन होगा। इधर, देवनारायण भागवत मंडल ट्रस्ट महागढ़ द्वारा कोटड़ी स्थित महर्षि दाधीच छात्रावास में गुरुवार को कथा वाचक बाल व्यास राहुल महाराज ने भागवत कथा में प्रभु महिमा का वर्णन किया। यहां 24 सितंबर तक दोपहर 12 से 4 बजे तक कथा चलेगी।

छावनी रामचंद्रपुरा में चल रही भागवत कथा के दौरान उपस्थित भक्त।