हंगामा भर रह जाए पंजाबी कार्यक्रम
दशहरेमेले में हर साल होने वाला पंजाबी कार्यक्रम हर बार की तरह केवल हंगामा बनकर नहीं रह जाए। उसमें सिख समाज के इतिहास, संस्कृति और समर्पण की झलक भी दिखाई दे। इसलिए कार्यक्रम और कलाकारों का चयन करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए। यह बात दशहरा मेले में कार्यक्रमों के लिए गुरुवार को महापौर डा. र|ा जैन के साथ सिख समाज के प्रतिनिधियों ने वार्ता के दौरान कहीं। मेले में समाजों की भागीदारी बढ़ाने के लिए महापौर के आमंत्रण पर सिख समाज अल्पसंख्यक समाज के प्रतिनिधिमंडल आए थे।
वार्ता में निगम अधिकारियों की मौजूदगी में सिख समाज की ओर से पार्षद शरणजीत कौर, तरुमित सिंह बेदी, डा. जेएस सरोया, कमलदीप सिंह, राजेंद्र सिंह, परमजीत सिंह, अवतार सिंह आिद शामिल हुए। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि महापौर की पहल पर नगर निगम ने पहली बार उन्हें पंजाबी कार्यक्रम में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। बैठक में आए लोगों ने कार्यक्रमों के वर्तमान स्तर तथा कार्यक्रम के दौरान होने वाली अश्लीलता पर चिंता जताते हुए उसे एक नया स्वरूप प्रदान करने की इच्छा जताई।
इसी तरह गजल, मुशायरा कव्वाली कार्यक्रम के लिए मुस्लिम समाज के लोगों के साथ बैठक की। डाॅ. इकबाल डॉ.. अर्शी इकबाल, लियाकत अली अंसारी, सरपंच रफीक पठान, डीसीसी सदस्य सलीम भाई, अफरोज खान, आबिद कुरैशी, बाबूभाई आदि समाज के लोगों ने दोनों कार्यक्रम में भागीदारी के लिए अपनी रूचि दिखाई। चर्चा के दौरान मुशायरे में आमंत्रित किए जाने वाले शायरों कव्वालों के नाम पर चर्चा की गई। चर्चा के बाद सिख मुस्लिम समाज के लोगों ने महापौर अधिकारियों से कार्यक्रमों के संबंध में विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने के एक-दो दिन का समय मांगा है।
मेला प्रकोष्ठ में पंजाबी समाज के साथ बैठक करतीं महापौर र|ा जैन।