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तैराकों के रिकॉर्ड का हिसाब नहीं शिक्षा विभाग के पास

7 वर्ष पहले
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कोटा| राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में बनने वाले नए रिकॉर्ड का कोई ब्योरा शिक्षा विभाग के पास नहीं रहता। ऐसे में खिलाड़ियों द्वारा की जाने वाली जी तोड़ मेहनत मात्र मेडल तक सिमट कर रह जाती है। विभिन्न इवेंट में अब तक का बेस्ट टाइमिंग क्या है, यह जानकारी भी शिक्षा विभाग के पास नहीं रहती। दरअसल, इसके पीछे हर साल मेजबान बदलने का कारण अव्यवहारिक कारण बताया गया है। जो प्रतियोगिता कोटा में हो रही है, इसमें तैराक का आकलन मात्र उसकी पोजीशन से लगाया जा रहा है। टाइमिंग को महत्व नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में तैराक राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में टाइमिंग की वजह से ही पिछड़ जाते हैं।