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प्रिंसिपल और प्रोफेसरों की लगी क्लास सीखा अब नए तरीके से कैसे पढ़ाएं

7 वर्ष पहले
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डॉ.विजय सरदाना ने बताया कि एमसीआई ने शिक्षण का स्तर सुधारने के लिए तीन दिन का ये बेसिक कोर्स तैयार किया है। वर्तमान में जो टीचिंग स्टाइल है वो काफी पुराना है। इस कोर्स को करने के लिए कोटा से हम 8 डाक्टर अहमदाबाद गए थे। वहां से आने के बाद एमसीआई ने कोटा में ही इस कोर्स को शुरू करने की मंजूरी दी थी। जो भी डाॅक्टर टीचिंग का काम कर रहे हैं, उन्हें अपडेट रखने के लिए ये कोर्स करना अनिवार्य हो गया है। डॉ. देवेंद्र विजयवर्गीय ने बताया कि इस कोर्स में ग्रुप डिस्कशन से माइक्रो टीचिंग के तरीके बता रहे हैं। उनके अनुसार अब जोर इस बात पर नहीं है कि क्या पढ़ाएं, अब जोर इस बात पर है कि कैसे पढ़ाए कि उनकी लंबे समय तक उपयोगिता बनी रहे।

अच्छाअनुभव है

इसक्लास में पढ़ने आए झालावाड़ मेडिकल काॅलेज के प्रिंसिपल डॉ. आरके आसेरी ने इस क्लास के अनुभव शेयर करते हुए कहा कि इस कोर्स के लिए कोटा से टीम उन्होंने ही भेजी थी। आज उनका स्टूडेंट बनकर उनकी क्लास में बैठने में काफी खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि नई-नई टेक्नोलॉजी से जब टीचर अपडेट होंगे तो ही वे स्टूडेंट को भी अपडेट रख पाएंगे।

हर5 साल में करना होगा ये कोर्स

एमसीआईद्वारा इस कोर्स के आब्जर्वेशन के लिए अहमदाबाद से डॉ. कीर्ति पटेल को भेजा है। वह तीन दिन तक यहीं रहेंगी और क्लास को देखकर अपनी रिपोर्ट एमसीआई को देगी। एमसीआई के अनुसार अब टीचिंग से जुड़े हर डॉक्टर को ये कोर्स हर 5 साल में एक बार करना अनिवार्य होगा।

बदलाव के साथ-साथ चलने की मशक्कत

मेडिकल काॅलेज मंे वर्कशॉप ऑन मेडिकल एजुकेशन टेक्नोलॉजी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वर्कशॉप को सं्बोघित करतीं डाॅ. दीपिका मित्तल और उपस्थित मेडिकल प्रोफेसर्स।