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महिलाओं ने बैंड बजाकर दिया नारी शक्ति का संदेश

7 वर्ष पहले
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दादाबाड़ीआरएसी ग्राउंड में मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला सम्मेलन का समापन हुआ। बारां, छबड़ा, बांसवाड़ा, गुना और जबलपुर से जैन समाज की महिलाएं बैंड टीम में शामिल हुई। उन्हींने वाद्ययंत्रों के माध्यम से जयघोष करते हुए महिला शक्ति की हुंकार भरी। महिलाओं के पांच बैंड में लाल, केसरिया चुनरी पहने बैंड (दिव्य घोष) बजाते हुए दादाबाड़ी जैन नसियां से रवाना होकर सेक्टर तीन-चार होते हुए आरएसी ग्राउंड पहुंचे। हाथों में ड्रम, नगाड़ा, झांझर, शहनाई, मंजीरा, बांसुरी बजाते परेड के रूप में कदम से कदम थामे चल रही थी। हाथों में ध्वज, धार्मिक प्रतीक कलश, स्वस्तिक, ओम और जिनवाणी थी। यह दिव्य घोष रास्ते भर आकर्षण का केंद्र बना रहा।

आरएसी ग्राउंड पहुंचने पर मुनि संघ का जयघोष के साथ नमोस्तु कर बैंड टीम ने आशीर्वाद लिया। मुनिसंघ के अलावा देशभर से आई करीब दो हजार महिलाओं के अलावा बड़ी संख्या में समाजबंधु इसमें शामिल रहे। सम्मेलन में कैंसर रोगियों की सेवा के लिए जयपुर की विमला जैन और गुना की ज्योति टोंग्या को स्कूलों में सहयोग और सामाजिक कार्य के लिए नारी गौरव सम्मान से नवाजा गया।

मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज ने प्रवचन में कहा कि बदलते परिवेश में महिलाएं ढलें, लेकिन भारतीय संस्कृति परंपरा को भूलें। भविष्य में महिला सम्मेलन होकर मां-बेटी पिता-पुत्र जैसे अनूठे सम्मेलन होने चाहिए। सम्मेलन का मकसद धर्म संस्कृति को आगे बढ़ाना पाश्चात्य संस्कृति के कुप्रभाव से नई पीढ़ी को बचाना है। धार्मिक सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं के साथ-साथ बेटियों को भी आगे लाना होगा। बेटियों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ स्वावलंबी बनाने पर जोर देना होगा। नारी के पहनावे पर उन्होंने कटाक्ष किया।

सुधा सिंधु कोटा संभाग की महामंत्री सुनीता नगेदा ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी किशनगढ़ निवासी सुशीला पाटनी परिवार ने पादप्रक्षालन महाआरती की। समाज के वीरेंद्र जैन ने बताया कि कोटा में बड़े स्तर पर राष्ट्रीय महिला सम्मेलन पहला आयोजन है।

दादाबाड़ी जैन निसयां से आरएसी ग्राउंड तक शोभायात्रा में बैंड के साथ महिलाएं जय घोष करतीं हुईं निकली।