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दिल की नजरों से देखा तो लगा जैसे जन्नत का नजारा पहाड़ों में है

7 वर्ष पहले
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कोटा| ‘मेरेसैलानी दाता पहाड़ों में है, नक्शबंदी का राजा पहाड़ों में है, दिल की नजरों से देखा तो ऐसा लगा जैसे जन्नत का नजारा पहाड़ों में हैं। है जीनते दो जहां मोहम्मद जमा ले अर्श-ए-उला मोहम्मद, खुदा से उनको जुदा समझो, खुदा का है आईना मोहम्मद, रंग अपने मेहबूब की निस्बत का, नस-नस में भर ले, कर ले पीर को राजी...\\\' हाजी अब्दुल रहमान सैलानी सरकार के उर्स मुबारक मौके पर कव्वाल लतीफ हेरां एंड पार्टी ने कुछ इस अंदाज में हुजूर की शान में सूफियाना कलाम पेश किए।

रविवार को इशा की नमाज के बाद रात 10 बजे खानगाह सैलानी भट्टजी घाट पाटनपोल में महफिल-ए-कव्वाली का प्रोग्राम हुआ। इसमें हाड़ौती से बड़ी संख्या में आए अकीदतमंदों ने शिरकत की। कव्वाली की शुरुआत फातेहा शिजराख्वानी के साथ हुई। अकीदतमंदों की फरमाइश पर कव्वाल अब्दुल राजिक हैरां और अब्दुल वाहेद नादा ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए। सुबह 5 बजे फातेहा के साथ कुल की रस्म अदा की गई। इसी के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन हुआ। इस दौरान लंगर तकसीम किया गया।

घाट पर कव्वाली पेश करते कव्वाल लतीफ हेरां।