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अनावश्यक अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के कारण कश्मीर का मुद्दा बना जटिल समस्या

7 वर्ष पहले
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कोटायूनिवर्सिटी में बुधवार को सामाजिक विज्ञान विभाग की ओर से मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जम्मू कश्मीर-तथ्य और चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यवाहक वीसी ओंकार सिंह ने इसका शुभारंभ किया। उन्होंने जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र की स्थापना पर जोर डाला।

पहले सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और जम्मू कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ आशुतोष भटनागर ने जम्मू कश्मीर-भौगोलिक सांस्कृतिक एकात्मकता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पाक अधिकृत गिलगिटस्तान के मूल निवासियों के स्वतंत्रता आंदोलन और भारतीय संस्कृति से उनकी निकटता को देखते हुए उनके मानवाधिकारों की भी सुरक्षा की जानी चाहिए। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. एनके जैमन ने की। दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक अरुण कुमार ने कहा कि अनावश्यक अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के कारण जम्मू कश्मीर का मुद्दा जटिल बना हुआ है। कश्मीर का मामला बिना लोकसभा और बिना संविधान संशोधन के संभव है। कश्मीर का मामला आते ही सारा ध्यान अंतरराष्ट्रीय मंच पर चला जाता है। उन्होंने धारा 370 और 35 के बारे में भी बताया। इस सत्र की अध्यक्षता राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एचडी चारण ने की। इस अवसर पर आरटीयू के वीसी एसएन व्यास, कोटा यूनिवर्सिटी के फैकल्टी मेंबर्स के साथ अन्य यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स भी मौजूद थे। सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रभारी एससी राजौरा ने सभी काने धन्यवाद दिया।

संगोष्ठी में कोटा यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक वीसी ओंकार सिंह 8मौजूद श्रोता।