आजपाश्चात्य संस्क
भास्कर न्यूज | कोटा
आजपाश्चात्य संस्कृति भारत देश में हमारे धर्म संस्कार को भ्रष्ट कर गुलामी की बेडिय़ों में जकड़ने पर आमादा है। सरकार को स्वदेशी की नीति पर चलना होगा और पाश्चात्य संस्कृति का खुला विरोध करना पड़ेगा। यह बातें मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने चातुर्मास महोत्सव की शृंखला में आरएसी मैदान में चल रही धर्म सभा में कहीं।
महाराजश्री ने कहा कि उच्च शिक्षा ही हर क्षेत्र में तरक्की का राज है। इसलिए हमें युवाओं को संस्कार के साथ-साथ बेहतर शिक्षा भी देनी होगी। धर्म, संस्कृति और संस्कार के अन
आजपाश्चात्य संस्कृति भारत देश में हमारे धर्म संस्कार को भ्रष्ट कर गुलामी की बेडिय़ों में जकड़ने पर आमादा है। सरकार को स्वदेशी की नीति पर चलना होगा और पाश्चात्य संस्कृति का खुला विरोध करना पड़ेगा। यह बातें मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने चातुर्मास महोत्सव की शृंखला में आरएसी मैदान में चल रही धर्म सभा में कहीं।
महाराजश्री ने कहा कि उच्च शिक्षा ही हर क्षेत्र में तरक्की का राज है। इसलिए हमें युवाओं को संस्कार के साथ-साथ बेहतर शिक्षा भी देनी होगी। धर्म, संस्कृति और संस्कार के अनुरूप शिक्षा की जरूरत है ताकि युवा संयम मार्ग पर चल सके। कर्म ही धर्म की ओर ले जाता है। इसलिए हमें अपने कर्म अच्छे रखने चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि गुरु को अपने भक्त की श्रद्घा रखने के लिए जैसा वह माने वैसा ही रहना चाहिए। संसार मे व्याप्त चेतन अचेतन वस्तुओं का प्रयोजन है।
संवादसे बढ़ता है प्रेम, विवाद से झगड़ा : महामंत्र सागरजी
महावीरनगर प्रथम में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अपने चातुर्मास क्रम में नियमित प्रवचन में महामंत्र सागरजी ने कहा कि संवाद से प्रेम बढ़ता है और विवाद से झगड़े बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि जो मिट्टी के लिए लड़ते हैं वो मिट्टी बन जाते हैं और जो पृथ्वी के लिए लड़ते हैं वो पृथ्वी के जीव बन जाते हैं। आत्मा अनंत कष्टों से घिरी है, अतः कर्म रूपी राग को बाहर निकालो तभी कल्याण होगा। जो बाहर के शत्रुओं पर विजय प्राप्त करे उसे वीर कहते हैं और जो आत्मा से कर्मों पर विजय प्राप्त करे वह महावीर कहलाता है। यदि किसी से दुश्मनी खत्म करनी है तो उसकी और थोड़ा मुस्करा दीजिए।
आरएसी मैदान में मुनि पुंगव सुधासागर महाराज का पाद प्रक्षालन करते समाजबंधु।