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घायल गायों को 13 साल से नया जीवन दे रही टीम

7 वर्ष पहले
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रेलवेट्रैक या सड़क दुर्घटना में घायल गाय हो या करंट से घायल कोई बंदर। या फिर पतंग की डोर से घायल कोई परिंदा। स्टेशन क्षेत्र में 13 साल से काम कर रही मुकेश अग्रवाल और उनकी टीम ऐसे जानवरों के लिए जीवन दायिनी का काम कर रही है।

स्टेशन क्षेत्र में हाट रोड पर 2001 में एक गाय खून से लथपथ तड़प रही थी। कई लोग तमाशबीन बने हुए थे। मुकेश बताते हैं कि जब वे वहां से निकले तो गाय की पीड़ा देखी नहीं गई। उन्होंने अपने दो दोस्तों को यह बात बताई और गाय को पास ही स्थित बालाजी मंदिर परिसर में ले गए। वहां उसका इलाज करवाया। कई दिन तक चले इलाज के बाद वो ठीक हो गई। उसके ठीक होने से मन में जो खुशी और संतुष्टि मिली, उसके बाद तो टीम ने ऐसी कई गायों का इलाज करवाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे आसपास के लोग घायल गायों की सूचना देने लगे। उनका इलाज तो शुरू कर दिया, लेकिन समस्या उन्हें रखने की थी। ऐसे में कुछ लोगों ने पास ही स्थित जवाहरलाल नेहरू स्कूल के पास खाली जगह पर गायों को रखने का सुझाव दिया। वहां व्यवस्था कर बीमार गायों को रखना शुरू किया।

मुकेश अग्रवाल पहले तो घायल गायों का प्राथमिक उपचार करते हैं, फिर स्कूल में बनाई गोशाला में ले जाते हैं।