कोटा। यूआईटी की आर्थिक रूप से कमजोर तबके की अफोर्डेबल योजना में आवेदन करने वाले दस हजार उपभोक्ताओं डेढ़ साल बाद जमा राशि मिल रही है, लेकिन उसमें दो से तीन हजार की कटौती प्रशासनिक खर्च के नाम पर की जा रही है। इससे उन्हें लगभग दो करोड़ रुपए का नुकसान व यूआईटी को फायदा हो रहा है।
यूआईटी की योजना में आवेदन करने पर लाटरी के बाद अयोग्य रहे उपभोक्ताओं को उनकी राशि लौटा दी जाती थी। इसमें यूआईटी प्रशासन ने बदलाव कर दिया है। अब राशि लौटाने से पहले प्रशासनिक खर्च के नाम पर कटौती करना शुरू कर दिया है। पूर्व में कांग्रेस शासन में भी इस नियम को लागू किया था, लेकिन तत्कालीन मंत्री शांति धारीवाल ने इसे रुकवा दिया था। अब फिर से यह कटौती लागू हो गई है। योजना में आवेदन करने वालों ने बताया कि उन्होंने डेढ़ साल पहले यूआईटी की योजना में अफोर्डेबल आवास के लिए आवेदन किया था।
लाटरी में नाम नहीं आने पर उन्हें राशि लौटाई जानी थी, लेकिन डेढ़ साल के इंतजार के बाद अब राशि दी जा रही है। यूआईटी प्रशासन ब्याज देने की बजाय कटौती कर रहा है। हर आवेदक को दो से तीन हजार रुपए कम मिल रहे हैं। यूआईटी सचिव मोहनलाल यादव का कहना है कि राशि नियमानुसार लौटाई जा रही है।