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सीपेज से तालाब बन चुके प्लॉटों को सही करने में फ्लाईएश बनी सहारा

6 वर्ष पहले
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कोटा। नदी पार की आधा दर्जन कॉलोनियों में भरे सीपेज के पानी की समस्या से निपटने के लिए अब लोगों ने थर्मल की राख का सहारा लिया है। खाली प्लॉटों में भरे पानी को इस राख से पाटा जा रहा है। मिट्‌टी की ट्रॉली महंगी होने के कारण लोगाें ने राख का विकल्प लिया है, क्योंकि मिट्‌टी की बजाय राख सस्ती पड़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन 8 से 10 ट्रॉली राख यहां की कॉलोनियों में डलवाई जा रही है।

प्लॉटों के अलावा कॉलोनियों के रास्तों पर भी थर्मल की राख डलवा रहे हैं, जहां से निकलने का रास्ता नहीं बचा है। दरअसल, नहर से सीपेज होने और ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने से पानी भरने की यहां बड़ी समस्या बनी हुई है। बूंदी रोड की ज्यादातर कॉलोनियां इस समस्या से परेशान हैं।

समस्याग्रस्त कॉलोनियां
चंचल विहार नया-पुराना, कृष्णा नगर, रिद्धि-सिद्वी नगर, लक्ष्मण विहार प्रथम-द्वितीय, अंबिका नगर, विकास नगर व हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी।
पानी भरा होने से लोगों के घरों तक जाने का रास्ता तक नहीं है
मिट्टी महंगी, राख सस्ती
लोगों ने मकानों को बचाने के लिए जो रास्ता ढूंढा उसमें राख का इसलिए इस्तेमाल किया कि वह मिट्टी से सस्ती पड़ती है। मिट्टी की एक ट्राॅली डलवाने पर 11-12 सौ का खर्चा करना पड़ता है। जबकि राख की ट्राॅली 5-6 सौ में उपलब्ध हो जाती है। कॉलोनियों में प्रतिदिन 8 से 10 ट्रॉली राख की रोजाना लोग मंगवा रहे हैं।
पिछली बारिश का ही पानी नहीं निकला
लक्ष्मण विहार निवासी रमेश आहूजा ने बताया कि ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने से लोग परेशान है। घरों में से निकलने वाला अपशिष्ट पानी भूखंडों में भरा है। पिछली बारिश का पानी सूखा नहीं और इस बारिश का पानी भी भरा है। मकानों को इससे सीधा नुकसान हो रहा है। लोगों ने प्रशासन के कई चक्कर काट लिए, लेकिन अभी तक समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।
प्रशासन मौन, परेशानी से निजात कैसे मिले
'यह समस्या एक-दो घर-परिवार की नहीं हैं, तकरीबन 4 से 5 हजार परिवार है। प्रशासन कुछ कर नहीं रहा हैं। ऐसे में परेशानी से निजात पाने के लिए मिट्टी व राख का सहारा लेना पड़ रहा है। मेरे घर का रास्ता पानी की वजह से नहीं है। मिट्टी डलवाकर रास्ता बनाया है। घर की दीवारों में सीलन आ रही है। फर्नीचर खराब हो रहा है। मकानों में करंट आने का हमेशा अंदेशा बना रहता है।' -मंजु मित्तल, अध्यक्ष, नदी पार अग्रवाल समाज महिला समिति

समस्या का समाधान होगा, पर टाइम लगेगा
'मैंने नालियों के निर्माण के लिए यूआईटी और निगम से मांग की है, लेकिन दोनों विभाग बजट का अभाव बता रहे हैं। उधर, 25 करोड़ की लागत से बनने वाले चार बड़े नालों के निर्माण कार्य का शुभारंभ हो गया है। 6-7 माह में यह काम हो जाएगा। ऐसे में हम समस्या का समाधान तो कर रहे है, पर परेशानी से निजात मिलने में टाइम लगेगा।' - राकेश पुटरा, पार्षद, वार्ड 2