पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • जमीन और मकानों का पता नहीं यूआईटी ने कमा लिए 70 करोड़

जमीन और मकानों का पता नहीं यूआईटी ने कमा लिए 70 करोड़

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कोटा। गरीबों को सस्ते मकान देने का सपना दिखाकर यूआईटी ने 1580 लोगों व बिल्डर से 70 करोड़ रुपए अपने खाते में जमा करा लिए। अब न तो मकान बन रहे और न इसके लिए जमीन दी जा रही है। आवंटी दो साल से यूआईटी के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें यूआईटी संतोषजनक जवाब तक नहीं दे पा रही। जिन अधिकारियों ने याेजना बनाई थी और आवंटन किया था, उनके तबादले हो गए। नए अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं है। जैसे ही मामले ने जोर पकड़ा, मंगलवार को कलेक्टर जोगाराम ने मामले में बैठक बुलाई। उन्होंने दो स्थानों भदाना व मोहनलाल सुखाड़िया योजना में बनाए जाने वाले मकानों की डीपीआर पर बिल्डर से चर्चा की। अब भी पता नहीं है कि मकान कब बनेंगे, कब आवंटियों को मिलेंगे।

यूआईटी ने ग्रुप हाउसिंग योजना में कमजोर आयवर्ग के लोगों के लिए अफोर्डेबल स्कीम तैयार की थी। इसमें वर्ष 2012 में 1580 मकानों के लिए आवेदन लेकर उनसे पूरी राशि भी जमा करवा ली। जब लोगों ने मकानों की पूछताछ की तो पता चला कि मकान तो अभी बने ही नहीं। जिस बिल्डर को मकान बनाने हैं, उसे जमीन नहीं दी गई। उसके द्वारा प्रस्तुत डीपीआर को मंजूर नहीं किया गया। दो साल से आवंटी यूआईटी के चक्कर लगा रहे हैं। जिन अधिकारियों के समय यह योजना बनाई गई थी, वे बदल गए। नए अधिकारियों को तो इसकी जानकारी तक नहीं है। जब यह मामला मौजूदा सचिव मोहनलाल यादव के पास पहुंचा तो उन्होंने इसकी फाइल खंगाली। पता चला कि बिल्डर ने दो जगह भदाना व मोहनलाल सुखाड़िया योजना के लिए डीपीआर बनाकर दी हुई है। इस पर फैसला होना है। इस पर उन्होंने कलेक्टर से बात करके मंगलवार को बैठक तय करवाई।
पुराने चले गए, नए अधिकारियों को जानकारी ही नहीं
चर्चा हुई पर फैसला नहीं
मकान बनाने को लेकर कलेक्टर जोगाराम की अध्यक्षता में मंगलवार को बैठक हुई। इसमें बिल्डर की डीपीआर पर चर्चा की गई, जिसमें सिविल कार्यों में पानी की लाइन व बिजली व्यवस्था पर सहमति बनी। अब भी इसे पूरी तरह मंजूर नहीं किया गया। मकानों का निर्माण कब से शुरू होगा, इस बारे में अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया। उधर, बिल्डर नवभारत कंस्ट्रक्शन कंपनी ने यूआईटी से अपनी जमा 25 करोड़ की राशि पर ब्याज की मांग की है। संचालक अजय बाकलीवाल ने कहा कि जब यूआईटी ने हमसे ब्याज सहित पैसा लिया है तो देरी के लिए अब यूआईटी ही उसी प्रकार से हमें ब्याज दे। यूआईटी ने 25 करोड़ रुपए बिल्डर के व 45 करोड़ रुपए आवंटियों से जमा करवा रखे हैं, जिनका वे ब्याज उठा रहे हैं।
... और अधिकारी अब भी कर रहे हैं गुमराह
इस पूरी व्यवस्था को देख रहे एक्सईएन आरके राठौड़ अब भी गुमराह करने वाली बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि डीपीआर मंजूर की जा रही है। ये मकान मोहनलाल सुखाड़िया व भदाना में बनाए जाने हैं। तीसरी जगह रानपुर में जमीन आवंटन का मामला भी सुलझ गया है। शीघ्र ही मकानों का निर्माण शुरू हो जाएगा। कब होगा, इस बारे में वे जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने यह तो माना कि बिल्डर व आवंटियों से यूअाईटी ने राशि वसूल कर ली है। उन्हें अब मकान बनाना है।