कोटा। कलेक्टर के बंगले के पीछे सरकारी जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर नया विवाद पैदा हो गया है। इस जमीन को पहले वन विभाग की बताते हुए कार्रवाई करने के लिए कहा गया था, अब वन विभाग ने जमीन अपनी होने से ही इनकार कर दिया। विभाग के अधिकारी ने कहा कि यदि प्रशासन इस जमीन को उनकी मानता है तो फिर कलेक्टर का बंगला भी वन विभाग की जमीन पर बना हुआ है।
खंड गांवड़ी व इसके पास की जमीन पर कब्जों को रोकने के लिए यूआईटी की टीम पहुंची थी, लेकिन यहां भाजपा नेताओं के विरोध के कारण टीम को बैरंग लौटना पड़ा था। कलेक्टर जोगाराम ने जमीन को वन विभाग की मानते हुए कार्रवाई करने के लिए डीएफओ को लिख दिया। वन विभाग के अधिकारी ने रिकॉर्ड देखा तो पाया कि जमीन के आवंटन की प्रक्रिया तो शुरू हुई थी, लेकिन पूरी नहीं हुई, इसलिए आज भी जमीन राजस्व विभाग के खाते में दर्ज है।
नोटिफिकेशन हुआ पर अधूरा
डीएफओ ललित सिंह ने कहा कि जमीन का वर्ष 1965 में गजट नोटिफिकेशन हुआ था, इसमें जमीन का रकबा 71 हैक्टेयर लिखा हुआ है, लेकिन खसरा नहीं बताया गया। यदि प्रशासन जमीन हमारे खाते में मानता है तो कलेक्टर का बंगला भी वन विभाग की जमीन पर है।
'वन विभाग की ओर से क्या पत्र भेजा गया, अभी उसका अध्ययन नहीं किया है। वन विभाग तो किसी भी जमीन को अपनी बताकर काम रोक सकता है।' -जोगाराम, कलेक्टर