कोटा। कोटा यूनिवर्सिटी के कॉमर्स एंड मैनेजमेंट विभाग की ओर से तैयार करवाई गई डिजिटल लैब के ताले अब तक 85 दिनों में 8 बार ही खुले हैं। 18 नवंबर को उद्घाटन वाले दिन और इसके बाद दिसंबर में सात दिन के इंडक्शन में ही यह लैब खुल पाई। अन्य दिन लैब पर ताले ही लटके नजर आते हैं। भाषा में सुधार के लिए यह लैब शुरू की गई थी। इसमें यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को इंग्लिश के साथ-साथ स्पेनिश, फ्रेंच और मेरेडियन भाषा सीखने की प्लानिंग थी।
विभाग इस लैब को सही तरीके से संचालित नहीं कर सका। अब 15 फरवरी से फिर से लैब शुरू करने की बात विभाग के प्रोफेसर्स कर रहे हैं। इस लैब में लैंग्वेज पर फोकस करने के साथ पर्सनालिटी डवलपमेंट पर भी काम किया जाना था। तत्कालीन वीसी मधुसूदन शर्मा ने इसकी जिम्मेदारी कॉमर्स एंड मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर राजीव जैन और अनिता सुखवाल को सौंपी थी। इस लैब में हिंदी, संस्कृत और उर्दू भाषा को भी शुरू करने को कहा था। वीसी शर्मा के रिटायरमेंट के बाद लैब के संबंध में की गई प्लानिंग फेल होती चली गई।
32 स्टूडेंट्स बैठ सकते हैं
लैब में एक बार में 32 स्टूडेंट्स बैठ सकते हैं। इसकी कुल लागत 11.50 लाख रुपए आई थी। एक साल के संचालन के लिए सपोर्ट राजकोट की कंपनी स्टेशन ई लैंग्वेज लैब की ओर से दिया जाना था। यह कंपनी टेक्निकल सपोर्ट के साथ ट्रेनिंग, साफ्टवेयर, ट्रबल शूटिंग के संबंध में जानकारी देती। इस लैब के उद्घाटन के समय विभाग की काफी तारीफ हुई थी। अब यहां रखे उपकरण काम में नहीं लिए जा रहे हैं।
'दिसंबर में सात दिन का इंडक्शन प्रोग्राम हुआ था। इसमें स्टूडेंट्स को लैब किस प्रकार काम करेगी, यह बताया गया था। अब 15 फरवरी से रेगुलर क्लासेज शुरू करने वाले हैं। एग्जाम की वजह से अभी लैब में क्लासेज नहीं हो रही हैं।' - प्रो. राजीव जैन, डीन एंड हैड, डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट
(फोेटो- कोटा यूनिवर्सिटी की डिजिटल लैब बंद पड़ी हुई।)