कोटा. हम हाथ क्यों मिलाते हैं, यह तो वेस्टर्न कल्चर है। हमारी संस्कृति ने तो दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते करना सिखाया था। बरसों पुराने अभिवादन के इस तरीके का कोई तो लॉजिक रहा ही होगा... छोटा नहीं, बल्कि इसके पीछे बहुत बड़ा लॉजिक है। यदि हाथ मिलाने के बजाय नमस्ते करने लगें तो भी स्वाइन फ्लू पर काफी अंकुश लग सकता है। क्योंकि इससे वायरस फैलने का खतरा नहीं होता। लेकिन अपनी यह मानना है यूएसए के कोलंबिया की यूनिवर्सिटी ऑफ मिजूरी के काॅर्डियोलॉजी फेलो डॉ. मयंक मित्तल का।
मूलत: कोटा के अग्रसेन बाजार निवासी डॉ. मित्तल इन दिनों घर आए हुए हैं और स्वाइन फ्लू को लेकर चल रही स्थिति को करीब से देख रहे हैं। सामाजिक जागरूकता के लिए उन्होंने महापौर महेश विजय से भी मुलाकात की है। दोनों देशों की तुलनात्मक स्थिति को उन्होंने भास्कर के साथ साझा किया-
1. सामाजिक जागरूकता
वहां : सामाजिक जागरूकता ज्यादा है। कोई छींक रहा है या खांस रहा है तो अपनी कोहनी को मुंह पर लगाएगा, हाथों को नहीं। कोहनी कभी दूसरे के संपर्क में नहीं आती, हाथ सभी के संपर्क में आते हैं।
यहां : छींकने या खांसने पर सब हाथों से मुंह ढंकते हैं। कोहनी लगाकर खांसने के बारे में तो कभी किसी ने बताया ही नहीं।
2. ट्रेनिंग: वहां : यूएसए में सभी हैल्थ केयर वर्कर्स को इस बीमारी को लेकर ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बगैर कोई काम नहीं कर सकता।
यहां : नर्सिंग स्टाफ तो छोड़िए, ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों को भी इसके बारे में सरकार के स्तर से कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई।
3 बचाव: वहां : अस्पताल में हर दरवाजे के बाहर एल्कोहल जेल लगा होता है। रोगी से मिलने से पहले और मिलने के बाद सभी अपने हाथों को एल्कोहल जेल से रब करके आते-जाते हैं। इससे वायरस नहीं फैलता।
यहां : आउटडोर में बैठने या इनडोर में देखने वाले डॉक्टरों के पास भी एल्कोहल जेल नहीं होता। स्वाइन फ्लू वार्ड में भी इसकी उपलब्धता नहीं है।
वैक्सीनेशन
वहां : वैक्सीनेशन के बिना कोई भी हैल्थ केयर वर्कर काम नहीं कर सकता। पांच साल से छोटे सभी बच्चों को भी वैक्सीन लगवाई जाती है, लोग खुद लगवाते हैं।
यहां : स्वाइन फ्लू वार्ड और लैब में काम कर रहे कर्मचारियों को भी वैक्सीन नहीं लग पाई है। जबकि ये तो हमेशा संक्रमित रोगियों के संपर्क में रहते हैं।