कोटा. प्रमुख चुनाव का मतदान 3 बजे प्रारंभ हुआ। 3.19 बजे पंचायत सह प्रभारी सुमन शर्मा, देहात जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह अमृत कुआं, विधायक भवानीसिंह राजावत, हीरालाल नागर पार्टी के सभी दस सदस्यों को लेकर पहुंचे। सदस्य मतदान केन्द्र राजीव गांधी भवन के अंदर गए। सुमन शर्मा, भवानीसिंह राजावत हीरालाल नागर 3.25 मिनट पर वापस चले गए। ऐसे में भाजपाइयों को परिणाम पूर्व से पता था।
पढ़ाई कर मनरेगा में मेट बना और अब प्रमुख
सुरेंद्रगोचर के परिचित राजू गोचर ने बताया कि सुरेन्द्र ने 12वीं की पढ़ाई कोटा से की। वर्ष 2009 में उन्हें मनरेगा में रोजगार मिला। कुंदनपुर ग्राम पंचायत के वह मेट बने। वर्ष 2010 में भरत सिंह के समर्थन से कुंदनपुर पंचायत के सरपंच बने। अब जिला परिषद का प्रमुख।
भरत सिंह सबसे पहले सुबह जिला परिषद पहुंचे
भरत सिंह शिष्य की जीत से इतने उत्साहित थे कि वह सुबह सवा दस बजे मतदान केन्द्र जिला परिषद पहुंच गए। साथ में डॉ. इकराम से वह यहां खड़े चर्चा करते रहे। कुछ देर बाद देहात जिलाध्यक्ष रूकमणि मीणा भी पहुंचीं। जो पूरे चुनाव में पर्यवेक्षक ज्योति खण्डेलवाल से नाखुश रहीं।
स्वच्छता की ली शपथ
जिला प्रमुख निर्वाचित होने के बाद सुरेन्द्र ने स्वच्छता की शपथ ली। हर वर्ष 100 यानी हर सप्ताह 2 घंटे श्रमदान करके स्वच्छता के इस संकल्प को चरितार्थ करूंगा। गंदगी फैलाऊंगा और किसी को फैलाने दूंगा। इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करूंगा।
मजदूर का बेटा बना प्रधान
पंचायत समिति लाडपुरा में हाली के पढ़े लिखे बेटे राजेन्द्र मेघवाल प्रधान बने हैं। उनके पिता रामनिवास गांव में ही एक किसान के यहां हाली मजदूरी करते हैं। पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए 21 साल 7 माह के मेघवाल ने भास्कर से बातचीत में कहा कि मेरी प्राथमिकता पंचायत समिति में आने वाली सभी 21 ग्राम पंचायतों में विकास का काम करवाना है। सभी को साथ लेकर काम करूंगा। मेघवाल के दो भाई एक बहन है। बहन की शादी हो चुकी है। भाई पंकज कैथून में मोटरसाइकिल रिपेयरिंग का काम करते हैं। मां ग्यारसी बाई भी कभी-कभी खेत पर फसल काटने की मजदूरी करने जाती हैं। मेघवाल का कहना है कि मैं अब पिता से मजदूरी नहीं करवाना चाहता। प्रयास करूंगा कि वे अब हाली मजदूरी नहीं करें।
मजदूरी करके फीस जमा करवाई
मेघवाल ने कहा कि एमए तक की पढ़ाई मैंने मजदूरी करके की है। जब फीस के लिए पैसे का इंतजाम होता नहीं दिखता था तो मैं खुद मजदूरी करने जाता था। मजदूरी के जो रुपए आते थे उन्हें एकत्रित करता था। बाद में फीस जमा करवाता था। उनकी इच्छा एलएलबी करने की है।
मेरी पंसद का प्रत्याशी होता, तो जिला प्रमुख भाजपा का बनता
संगठन ने मेरी राय नहीं मानी। अन्यथा जिला प्रमुख भाजपा का ही बनता। खाद की किल्लत, क्षेत्र को सरकार में प्रतिनिधित्व नहीं मिला, सांसद का हमेशा दिल्ली में बैठे रहने के कारण जनता भाजपा के विरोध में इस चुनाव में उतरी। ऐसे में यह चुनाव पार्टी को आगामी समय के लिए सीख दे गया। बूंदी में बीजेपी की ओर से क्रॉस वोटिंग होना चिंता की बात है। -भवानीसिंहराजावत, लाडपुरा विधायक