पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • चंबल फर्टिलाइजर्स ने बंद किया एक यूरिया प्लांट

चंबल फर्टिलाइजर्स ने बंद किया एक यूरिया प्लांट

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

देशकी सबसे बड़ी उर्वरक उत्पादक कंपनी चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (सीएफसीएल) ने कोटा जिले के गढ़ेपान स्थित अपने दो में से एक प्लांट को चालू वित्त वर्ष के लिए बंद कर दिया है। इसके लिए सरकार की प्रतिकूल नीतियों को जिम्मेदार बताया जा रहा है। कंपनी ने बीएसई पर इसका कॉर्पोरेट एनाउंसमेंट भी कर दिया है। यह प्लांट अब नए वित्त वर्ष में यानी अप्रैल में ही शुरू होगा। इसकी क्षमता तीन हजार टन यूरिया रोजाना उत्पादन की है और दो माह इसके बंद रहने से 1.80 लाख टन यूरिया नहीं बन पाएगा।

ऐसे में अगले सीजन में यूरिया संकट और बढ़ने की आशंका है। यह पहला मौका है, जब सीएफसीएल का कोई प्लांट इतने लंबे समय के लिए बंद रहेगा। हालांकि कंपनी इस अवधि में प्लांट की मरम्मत जारी रखेगी।

देश की बड़ी उर्वरक उत्पादक कंपनी: सीएफसीएलके कोटा में दो यूरिया प्लांट हैं। दोनों की सालाना उत्पादन क्षमता 20 लाख टन है। यह उर्वरक उत्पादन के मामले में देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है। देश के लगभग 11 राज्यों को यहां उत्पादित यूरिया सप्लाई होता है। दोनों प्लांट उच्च तकनीक से बने हैं, जिनमें जापान, इटली, डेनमार्क यूएस की टेक्नोलॉजी अपनाई गई हैं। पहला प्लांट 1994 और दूसरा 1999 में शुरू किया गया था। वर्तमान में जो प्लांट बंद किया है, वह वर्ष 1999 में शुरू हुआ था।

इसलिए बंद करना पड़ा प्लांट

यूरियासब्सिडाइज्ड होता है। उत्पादन करने वाली कंपनी को केन्द्र सरकार अनुदान देती है। इसके लिए हर प्लांट का कोटा तय होता है। सामान्यत: यूरिया की जरूरत ही इतनी होती है कि देशभर में कार्यरत प्लांट्स भी उतना उत्पादन नहीं कर पाते, जितना किसानों को चाहिए होता है। ऐसे में सरकार सभी प्लांट्स को अपनी क्षमता के अनुरूप उत्पादन करने के लिए कह देती है और उस पर सब्सिडी दे देती है। इस बार सरकार ने सीएफसीएल को जितना लक्ष्य दिया था, उतना उत्पादन तो कंपनी ने कर दिया। इसके बाद कंपनी ने यह उत्पादन कोटा बढ़ाने के लिए प्रयास किए तो सरकार ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

ऐसे में दो में से एक प्लांट बंद करना पड़ गया।