नाटक में बताया संस्कारों का महत्व
कोटा. महर्षिदधीचि धाम में चल रही वाल्मीकीय रामकथा में संत गोविंद देवजी गिरी महाराज ने अन्न का महत्व बताते हुए कहा कि इंसान जैसा अन्न खाता है वैसा ही उसका मन होता है। व्यक्ति के खान-पान का उसके जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। कथा के दौरान भारत माता की आरती उतारी गई। गीता परिवार के 20 से अधिक बच्चों ने सभी को नृत्य नाटिका के माध्यम से धर्म मार्ग पर चलने की सीख दी। बच्चों ने नाटिका के माध्यम से बताया कि जन्म के समय से ही बच्चों में संस्कारों के बीज बोने चाहिए। कथा में रविवार को राम-भरत संवाद एवं 15 दिसंबर को सुतीष्ण अगत्स्य मिलन, पंचवटी निवास प्रसंग होगा।