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लॉटरी में 27 पार्षदों की जमीन खिसकी मेयर के लिए बिरला गुट ताकतवर

7 वर्ष पहले
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पहला रास्ता साफ हुआ तो खिल उठे चेहरे

पर्ची खुली तो पलकें भी नहीं झपकीं

नगरनिगम चुनावों के लिए शुक्रवार को निकाली गई लॉटरी ने राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। मेयर के लिए तैयारी कर रहे कई दावेदारों को वार्ड आरक्षित हो जाने के कारण दूसरे वार्ड का रुख करना पड़ेगा। वहीं ओम बिरला और शांति धारीवाल गुट के दो दावेदारों का अपने ही वार्ड से लड़ने का रास्ता साफ हो गया है। लॉटरी के बाद मौजूदा 60 में से 33 पार्षद फिर अपने ही वार्ड में भाग्य आजमा सकेंगे, लेकिन 27 पार्षदों को वार्ड बदलना पड़ेगा। आरक्षण का सबसे ज्यादा असर लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र के वार्ड में पड़ा, वहीं कोटा दक्षिण और उत्तर में सामान्य वर्ग के वार्डों की संख्या अधिक रही। कलेक्ट्रेट के टैगोर हॉल में कलेक्टर की मौजूदगी में वार्ड आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसमें 24 वार्ड सामान्य पुरुष, 12 वार्ड सामान्य महिला, 9 वार्ड ओबीसी पुरुष, 5 वार्ड ओबीसी महिला, 8 वार्ड एससी पुरुष, 4 वार्ड एससी महिला, 2 वार्ड एसटी पुरुष और 1 वार्ड एसटी महिला के लिए आरक्षित हुए।

पर्चीनिकलते ही लटक गए चेहरे: लॉटरीनिकलते ही पूर्व उपमहापौर योगेन्द्र खींची, मौजूदा पार्षद ईश्वर गंभीर और आनंद पाटनी के चेहरे मायूस हो गए। इनके वार्डों का आरक्षण बदल गया। खींची वार्ड 23 से तैयारी कर रहे थे, लेकिन यह ओबीसी हो गया। इसी प्रकार ईश्वर गंभीर का वार्ड 57 तथा आनंद पाटनी का वार्ड 16 आरक्षित हो गया। हालांकि बिरला खेमे में खुशी दिखी। सांसद ओम बिरला के भाई नरेन्द्र बिरला वार्ड 44 से तैयारी कर रहे हैं। यह वार्ड पहले ओबीसी महिला था, लेकिन अब सामान्य हो गया। इसी वार्ड में कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद शर्मा भी रहते हैं।

सांसद बिरला के भाई नरेंद्र बिरला का वार्ड सामान्य घोषित हुए तो उनके साथ खड़े यूआईटी के पूर्व चेयरमैन रवींद्र त्यागी समेत सबके चेहरे खिल उठे।