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प्रतीक्षा की आंखें रहेंगी जिंदा

7 वर्ष पहले
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शिक्षकभर्ती परीक्षा में फेल होने पर वह इतनी निराश हुई कि शुक्रवार रात घर में फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। जीते जी वह अखबारों में नेत्रदान की खबरें पढ़कर खुद भी नेत्रदान की इच्छा जताती रहती थी। उसकी इच्छा की पालना में आज उसका नेत्रदान करवा दिया गया। उषा कॉलोनी निवासी इस 27 वर्षीय प्रतीक्षा राठौर के पिता रमेशचंद राठौर की काफी पहले मौत हो गई थी। घर में वह और उसकी मां तथा भाई ही हैं। भाई पर ही परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी है। वह ही प्रतीक्षा को पढ़ा भी रहा था। प्रतीक्षा की आगामी फरवरी महीने में शादी होने वाली थी। उसने शिक्षिका बनने के लिए आरपीएससी की परीक्षा दे रखी थी।

कुछ दिन पहले घोषित रिजल्ट में वह फेल हो गई। इससे वह दुखी रहने लगी थी। बीती रात उसने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। तड़के घर में जाग होने पर घटना का पता चला। विनय आस्तोलिया, अविनाश जायसवाल आदि ने युवती की नेत्रदान की इच्छा के बारे में भाविप के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा को बताया। शर्मा ने कोटा से टीम को बुलवाकर नेत्रदान करवाया। भवानीमंडी में नेत्रदान की यह सातवीं घटना है।