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यूआईटी ने पट्टे बनाने का काम रोका

6 वर्ष पहले
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कोटा|यूआईटी नेवर्ष 1999 के बाद के अनरजिस्टर्ड इकरारनामे के आधार पर पट्टे बनाने पर रोक लगा दी है। इस बारे में अब यूआईटी ने राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। कांग्रेस शासन में राज्य सरकार ने अभियान चलाकर कृषि भूमि पर बनी कॉलोनियों में पट्टे बनाए थे। इसमें अपंजीकृत इकरारनामा मुख्तारनामा को ही आधार बनाया गया था। अभियान समाप्त होने के बाद अब यूआईटी ने इस आधार पर पट्टे बनाने से इंकार कर दिया है। इससे बड़ी संख्या में पट्टे का इंतजार कर रहे लोगों को मायूसी हो रही है।

राज्यसरकार के आदेश से रुका: उपसचिवमान सिंह के अनुसार यूआईटी पट्टे जारी कर रही थी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से श्री गंगानगर यूआईटी सचिव को दिए आदेश में कहा था कि बिना पंजीकृत इकरारनामे के आधार पर पट्टा जारी नहीं किया जाए। यह पत्र सभी यूआईटी को भेजा गया है। इसमें 17 जून 1999 के पहले के अपंजीकृत इकरारनामे को मान्यता दी गई है, लेकिन बाद वालों को नहीं। इस कारण अब यूआईटी ने पट्टे बनाने का काम रोक दिया है। उन्होंने कहा कि इस बारे में राज्य सरकार को पत्र लिखा गया है, जिसमें पूछा गया है कि 17 जून 1999 के बाद निष्पादित अपंजीकृत इकरारनामे मुख्तारनामे के आधार पर पट्टा जारी किया जा सकता है अथवा नहीं।