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सुख में ही सुमिरन करें तो दुख नहीं आएगा

6 वर्ष पहले
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कोटा|आरकेपुरम सेक्टर-एस्थित बालाजी धाम में चल रही श्रीमद भागवत महापुराण गुरुवार को भी जारी रही। कथा में संत प्रवर धर्मदेव महाराज ने सत्संग की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि जब-जब भी धरती पर पाप और अत्याचार बढे हैं, तब भगवान ने स्वंय अवतार लेकर पापियों का संहार करते हैं। संत ने कहा कि जब जीवात्मा परमात्मा को याद करता है, तब तक तो ठीक है, लेकिन लोग दुःख में ही भगवान को याद करते हैं। अगर सुख में ईश्वर का सुमिरन किया जाए तो दुख आएंगे ही नहीं। अगर हम दूसरे लोगों की मदद करेंगे तो दुख के समय लोग हमारे सहयोग को तैयार रहेंगे। तप सुमरिन, भजन से साधक दूर हो जाता है, इससे दुख आता है। इसलिए कथाओं में जाकर श्रवण करना चािहए।