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डामर घोटाले में दो आरोपियों को 3-3 साल की सजा

7 वर्ष पहले
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कोटा| कोर्ट ने डामर घोटाले में आरोपी सुरेश कुमार चौधरी और उसके भाई प्रेमराज चौधरी को दोषी मानकर 3-3 साल की सजा सुनाई है। साथ ही पांच-पांच हजार का जुर्माना किया है। इसी मामले में आरोपी शंकरलाल केन, चंद्रकुमार पाठक और लखपत राज को षड‌्यंत्र रचने के अपराध में छह-छह माह की सजा सुनाई है। जबकि फरार आरोपी महेंद्र सिंह के विरुद्ध जांच लंबित रखी गई है। दो आरोपी रामनाथ और नरेंद्र शर्मा की मृत्यु होने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई ड्रॉप कर दी गई।

पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधिशासी अभियंता जीके बांगड़ा ने 8 दिसंबर 1994 को नयापुरा थाने में केस दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि डामर के 8,680 ड्रम पीडब्ल्यूडी कोटा खंड के लिए मथुरा रिफाइनरी से भेजे गए थे। जो यहां नहीं पहुंचाकर खुर्द-बुर्द कर दिए गए। पुलिस ने केस दर्ज कर नूतन कॅरियर्स भरतपुर के मालिक सुरेश कुमार चौधरी और पार्टनर उसके भाई प्रेमराज चौधरी, शंकरलाल केन, चंद्रकुमार पाठक, लखपत राज सहित अन्य के खिलाफ चालान पेश किया था।