कोटा। 42 साल के शेर खान पेशे से कंपाउंडर हैं और एक निजी अस्पताल में नौकरी करते हैं। लेकिन, इन्हें पहचान मिली है इनके मुफ्त टीकाकरण अभियान से। 18 साल पहले शुरू हुई मुहिम में अब तक ये 20 हजार मुफ्त टीके लगा चुके हैं। जब भी किसी बच्चे, लड़की या गर्भवती को टीका लगवाने की जरूरत होती है, खान वहां तुरंत पहुंच जाते हैं। यही नहीं खुद अपने स्तर पर वैक्सीनेशन का इंतजाम कर मुफ्त टीके लगा रहे हैं।
यूं तो शेर खान बच्चों के एक अस्पताल में नौकरी करते हैं, लेकिन जब से नर्सिंग का कोर्स किया है, उनकी सबसे ज्यादा रुचि टीका लगाने और उसके बारे में प्रचार-प्रसार करने में रही है। बच्चों में एक साल तक की उम्र तक लगने वाले समस्त टीके, लड़कियों को बीमारी से बचाने के लिए लगाए जाने वाले रुबेला के टीके, पीलिया सहित अन्य संक्रमण की रोकथाम के लिए हेपेटाइटिस बी, थैलेसीमिया रोकने आदि टीके वे मुफ्त लगा रहे हैं। इसके लिए वे कभी रोटरी क्लब, अलफलाह सोसायटी, निष्ठा फाउंडेशन आदि संस्थाओं की मदद लेकर वैक्सीन लाते हैं। बाद में सरकारी स्कूलों में जाकर छात्राओं, मोहल्लों में, घर पर, शिविर लगाकर लगाते हैं। इन संस्थाओं से मदद मिलने के बाद भी हर साल करीब 40 हजार रुपए के टीके वे खुद और उनके दोस्त खरीदते हैं।
यूं हुई शुरुआत
18 साल पहले रोटरी क्लब द्वारा टीकाकरण का शिविर लगाया गया था। उस समय उन्हें टीका लगाने के लिए बुलाया गया। तब से उनकी सफाई और व्यवहार देखकर उन्हें बार-बार बुलाया जाने लगा। उसके बाद से तो खान ने इसे ही समाजसेवा का तरीका बना लिया और खुद ही निशुल्क टीकाकरण करने में जुट गए।
(फोटो- हर साल 40 हजार के टीके शेरखान खुद और दोस्तों के सहयोग से खरीदते हैं)