कोटा। मेडिकल काॅलेज के एक आदेश से सोमवार को नए अस्पताल के ऑर्थोपेडिक व सर्जरी विभाग में जंग छिड़ गई। आदेश के अनुसार ऑर्थोपेडिक विभाग के पास से ऑपरेशन थिएटर लेकर सर्जरी विभाग को दे दिए गए। यानी सर्जरी के ऑपरेशन बढ़ा दिए और ऑर्थोपेडिक के घटा दिए। ऑर्थोपेडिक सर्जन इस आदेश के खिलाफ खड़े हो गए। उन्होंने अस्पताल अधीक्षक से लेकर प्रिंसिपल तक से मिलकर आपत्ति दर्ज करवाई। दोनों जगह पर जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने मामले को सांसद ओम बिरला और विधायक संदीप शर्मा तक पहुंचाया।
नए अस्पताल में ऑर्थोपेडिक विभाग को 2 थिएटर में 6 दिन दे रखे थे, जबकि सर्जरी विभाग को दोनों थिएटर में एक-एक दिन दिए हुए थे। ऑर्थोपेडिक की यहां 4 यूनिट खुली हुई हैं। बाद में धीरे-धीरे सर्जरी के अन्य विभाग खुलने से ओटी की जरूरत बढ़ती गई, लेकिन थिएटर में मिलने वाले दो दिन की संख्या नहीं बढ़ाई। अस्पताल में सर्जरी के अन्य विभाग भी शुरू होने से डिमांड बढ़ने लगी तो यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी व जनरल सर्जरी की टेबल बढ़ाने की मांग उठी। इसके लिए बनाई कमेटी ने सोमवार को रिपोर्ट दी। जिसके अनुसार सर्जरी व ऑर्थोपेडिक को 7-7 टेबल कर दी। साथ ही सोमवार से ही आदेश लागू कर सर्जरी का काम चालू भी कर दिया। इस बात का पता चलते ही ऑर्थोपेडिक के डॉक्टरों ने विरोध किया, लेकिन कमेटी का निर्णय बताकर उन्हें चुप कर दिया गया।
'नई व्यवस्था से ऑर्थोपेडिक के ऑपरेशन आधे रह जाएंगे। प्रतिदिन 8 ऑपरेशन किए जा रहे थे, इस व्यवस्था से 4 ही हो पाएंगे। सबसे ज्यादा केस ही हड्डी के आते हैं। इस स्थिति में पेंडेंसी बढ़ेगी और मरीज परेशान होंगे। अन्य विभागों को भी थिएटर उपलब्ध करवाए जाएं, लेकिन उसके लिए संसाधन और जुटाएं। ऑर्थोपेडिक के ऑपरेशन कम करने का कोई लॉजिक नहीं है। जिस कमेटी का निर्णय बताया जा रहा है उसमें हमारा पक्ष ठीक से नहीं सुना गया।' - डॉ. राजेश गोयल व डॉ. आरपी मीणा, ऑर्थोपेडिक यूनिट प्रभारी
'ऑर्थोपेडिक का हक छीनने की बात गलत है। ऑर्थोपेडिक को तो पहले ही नियम से ज्यादा थिएटर दिए हुए थे। सर्जरी की अधिक यूनिट होती हैं, इसलिए थिएटर भी उनके ही अधिक होंगे। अब दोनों को बराबर थिएटर दिए हैं। ये निर्णय एमसीआई के हिसाब से कमेटी बनाकर लिया गया है। जिसमें ऑर्थोपेडिक यूनिट के भी डॉक्टर थे।' - डॉ. आरएस मीणा, विभागाध्यक्ष सर्जरी
(फोटो- न्यू मेडिकल काॅलेज का अाॅपरेशन थिएटर, जिसे लेकर विवाद हुआ है)