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सत्य को स्वीकारने की आदत डालें

7 वर्ष पहले
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दादाबाड़ीनसियां जी के पास आरएसी ग्राउंड में शनिवार को मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज ने धर्म की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में स्वयं को समझने के लिए आत्मचिंतन करना चाहिए। ताकि वह पाप और पुण्य में भेद समझकर मोक्ष मार्ग पर चल सके। मुनिश्री ने कहा कि जीवन में किसी भी वस्तु का राग पालें। राग या मोह ही जीवन में दुख पतन का बड़ा कारण है। उन्होंने तुलसीदास जी का दृष्टांत बताते हुए श्रीरामचरित्र मानस की रचना करने की बात सुनाई। उन्होंने कहा कि हमें सदैव सत्य को स्वीकारने की आदत डालनी होगी। प्रवचन को जीवन मे उतारें तभी जीवन में कल्याण संभव हैं। गलती स्वीकारने से आत्म संतुष्टि के साथ अपराध भी कम हो जाता हैं।

आयोजन समिति के मुख्य संयोजक हुकुम जैन काका ने बताया कि गुलाबचंद चूने वाला परिवार, अजय बाकलीवाल और राजेंद्र हरसोरा ने पादप्रक्षालन महाआरती की। समिति के अध्यक्ष कैलाशचंद सर्राफ, राजमल पाटोदी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। रविवार सुबह 7:40 बजे से धर्म सभा होगी।

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