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मुआवजे की लड़ाई लड़ते हुए पति की हो गई मौत, अब पत्नी मांग रही हक

5 वर्ष पहले
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होमगार्ड विभाग मुआवजा राशि के लिए 4 सालों से पीड़ित को कटवा रहा चक्कर

विडंबना

होमगार्डविभाग अपने ही जवान की दुर्घटना होने पर उसकी मदद करने के बजाए नियमों में उलझाकर उसे चक्कर लगवाता रहा। विभाग से लड़ते-लड़ते जवान की मौत हो गई, लेकिन अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा। यहां तक कि विभागीय अधिकारी अपने उच्च अधिकारियों द्वारा लिखे गए पत्रों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे। पति के बाद अब प|ी अपने हक के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही है।

सकतपुरा, कुन्हाड़ी निवासी लक्ष्मीचंद मेवाड़ा (बेल्ट नंबर 484) 10 फरवरी 2012 को ड्यूटी के दौरान सीवी गार्डन में साइकिल से गिर गए। जिससे उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई, किडनी और लीवर भी फेल हाे गया। विभाग ने मदद मांगने पर उसे पूरे माह उपस्थित बताकर कोई सहायता करने से साफ इनकार कर दिया।

विभाग और जिंदगी से लड़ते-लड़ते 8 जनवरी 2015 में उसने दम तोड़ दिया। लक्ष्मीचंद मेवाड़ा की प|ी गायत्री मेवाड़ा को अधिकारी नियमों में उलझाकर मुआवजा राशि नहीं दे रहे। विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पत्र लिखने के बाद 7 अक्टूबर 2015 को राजस्थान गृह रक्षा मुख्यालय के उप महासमादेष्टा आरएस राणावत ने भी विभाग को कड़ा पत्र लिखकर मुआवजा राशि देने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी कोई सहायता नहीं मिल सकी।

मृतक लक्ष्मीचंद

कर रहे हैं कोशिश

^पूरामामला मेरी नॉलेज में है, मुआवजा राशि देने में विलंब तो हुअा है। जिसकी वजह केस तय समय से लेट फाइल करना है। जिसमें मौत के कारणों की स्पष्ट वजहों का उल्लेख नहीं था। विभाग फिर भी पूरी कोशिश करके मुआवजा राशि देने की कोशिश कर रहा है।

-अनवर एचखान, कमांडेंटहोमगार्ड विभाग कोटा

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