बसंत पंचमी: भगवान की बदली पोशाक शहर के मंदिरों में हुआ मां शारदा का शृंगार
बसंतपंचमी पर शहर के मंदिरों में भगवान का विशेष शृंगार करने के बाद धार्मिक आयोजन हुए। भगवान की पोशाक में भी बदलाव हुआ। गर्म और जरी की पोशाक के स्थान पर भगवान के दर्शन सूती पोशाक में हुए। स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की वंदना हुई। शुक्रवार को अबूझ सावा होने से घर-परिवार में शादियों का माहौल बना रहा। पाटनपोल स्थित फूल बिहारी मंदिर और बड़े मथुराधीश मंदिर में परंपरागत तरीके से भगवान के साथ होली खेली गई। यह आयोजन अब 40 दिन तक चलेगा।
कुमार क्लासेज में बसंत पंचमी का उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर संस्था निदेशक विकास कुमार ने उत्सवों की महत्ता पर प्रकाश डाला। राजकीय कॉलेज में प्राध्यापक गोष्ठी की ओर से बसंतोत्सव का आयोजन हुआ। इस मौके पर प्राचार्य टीसी लाेया ने मां शारदा को पुष्पहार समर्पित किया। दादू पंथी संप्रदाय के सभी समाज बंधुओं और श्रद्धालुओं ने बसंत पंचमी महोत्सव पाटनपोल स्थित दादू दयाल आश्रम में बड़ी धूमधाम से मनाया। इस मौके पर व्यवस्थापक रामनारायण स्वामी बामली ने बताया कि बसंत पंचमी से पूर्व संध्या पर अखंड दादूवाणी पाठ का आयोजन किया गया। जिसका समापन बसंत पंचमी को हुआ। जवाहरलाल नेहरू शिक्षा शास्त्री महाविद्यालय में भी बसंत पंचमी महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. अंजना व्यास द्वारा सरस्वती देवी का पूजन यज्ञ किया गया।
कोटा सुरभि के कार्यक्रम में पिंकी को बसंती का खिताब मिला।
पाटनपोल स्थित नामदेव धर्मशाला में स्थापना दिवस मनाते समाज के लोग।
रामधाम आश्रम में माता सरस्वती को पीले वस्त्र पहनाकर शृंगार किया गया।
बसंत पंचमी पर तलवंडी राधाकृष्णा मंदिर में फूलों से भव्य शृंगार किया गया।