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कविता पाठ में गूंजा पृथ्वीराज का शौर्य और चंदबरदाई का काव्य

5 वर्ष पहले
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गायत्रीपीठ साधनाश्रम बोरखेड़ा में चल रहे तीन दिवसीय बसंतोत्सव में शुक्रवार को यज्ञ-हवन और शाम को काव्य पाठ का आयोजन किया गया। यहां हाड़ौती भर से आए साधक और शहर के प्रबुद्धजन शामिल हुए। संत शंभूसिंह कौशिक महाराज के सानिध्य में शनिवार वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ हुआ। यहां साधकों ने 40 हजार आहुतियां दी।

शाम को गायत्री मां की आरती के बाद काव्य गोष्ठी हुई। यहां योद्धा पृथ्वीराज चौहान और महाकवि चंदबरदाई के बलिदान को याद किया गया। यहां पृथ्वीराज चौहान की वीरता और महाकवि चंदबरदाई की कुश्ल युद्ध नीति और कवि के साहित्य का बखान किया गया। शुभारंभ पर रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने जब मंच पर पृथ्वीराज के पराक्रम को... पृथ्वीराज चौहान यश की गाथा क्या गाई कवि ने और कवि भगवती प्रसाद ने वह हत्यारा कौन था कहो लिखे क्या नाम... सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया। डॉ. प्रमिला आर्य ने... वो राजा कहां? वो रानी कहां? जहां नानी सुनाती वो कहानी कहां? सुनाकर आनंदित कर दिया। कवि शिवराजसिंह श्रीवास्तव, जगदीश शर्मा ने भी कविता पाठ किया। संचालन रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने किया। आश्रम प्रबंधक नंदकिशोर शर्मा ने बताया कि इस मौके पर संत कौशिक ने गौ माता पर प्रवचन दिए। अंत में यज्ञदत्त हाड़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

गायत्री पीठ साधनाश्रम बोरखेड़ा में शनिवार को कवियों ने काव्यपाठ किया।

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