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खाद-बीज विक्रेताओं ने पूरे दिन बंद रखा कारोबार

5 वर्ष पहले
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केन्द्रसरकार की नई लाइसेंस नीति में खाद-बीज की बिक्री के लिए एग्रीकल्चर स्नातक की डिग्री अनिवार्य करने के विरोध में मंगलवार को शहर के सभी खाद-बीज विक्रेताओं ने अपना कारोबार बंद रखा। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

कोटा खाद बीज एवं कीटनाशक खुदरा व्यापार संघ के अध्यक्ष दुर्गाशंकर धाकड़ ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा नवीन लाइसेंस नीति 2015 में उर्वरक, कीटनाशक एवं बीज विक्रय करने के लिए एग्रीकल्चर विषय में स्नातक की डिग्री जरूरी कर दी है। इससे वर्षों से व्यापार करने वाले कारोबारियों की भी दुकानें बंद करने की नौबत गई है। नई नीति के तहत व्यापारियों को भी दो वर्ष के अंदर कृषि में स्नातक की डिग्री अनिवार्य कर दी गई है। जबकि इस डिग्री को प्राप्त करने में चार साल का पाठ्यक्रम है। अगर इस नियम को वापस नहीं लिया तो व्यापारियों की रोजी-रोटी छिन जाएगी।

उन्होंने बताया कि कृषि से संबंधित सभी प्रकार के आयामों एवं कृषि यंत्रों के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बीएससी एजी डिग्री धारक को करीब 35 वर्ष पूर्व सरकार ने सब्सिडी एवं ब्याज माफी की घोषणा की थी। इससे कई स्थानों पर एग्रो सर्विस सेंटर खुले थे, जो बाद में बंद हो गए। इससे सरकार का करोड़ों रुपए का कर्ज डूब गया। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मामले में स्वच्छ नीति अपनाई जाए ताकि वर्षों से कारोबार करने वालों पर कुठाराघात नहीं हो। ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से महासचिव दीपेश जैन, चैतन्‍य प्रकाश बंसल, प्रवीण जैन, मनीष माहेश्वरी एवं वे स्वयं मौजूद थे।

कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए खाद-बीज कीटनाशक के खुदरा व्यापारी।

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